नंदी की कहानी
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Story of Nandi
ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे ऋषि शिलाद को भय हुआ कि ब्रह्मचर्य व्रत के पालन के कारण उनकी मृत्यु के बाद उनका वंश समाप्त हो जाएगा. इस भय के चलते उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या शुरू की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने शिलाद ऋषि को दर्शन दिए और वर मांगने को कहा तब शिलाद ऋषि ने शिव से कहा कि उन्हें ऐसा पुत्र चाहिए, जिस पर आपकी कृपा सदैव बनी रहे । भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि उन्हें ऐसे ही पुत्र की प्राप्ति होगी. अगले दिन ऋषि शिलाद एक खेत से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि खेत में एक नवजात शिशु पड़ा है। वह बालक अत्यंत सुंदर व मोहक था। उन्होंने सोचा कि इतने प्यारे शिशु को ऐसे कौन छोड़कर चला गया? तभी शिवजी की आवाज आई- शिलाद यही तुम्हारा पुत्र है । ये सुनकर ऋषि शिलाद बहुत प्रसन्न हुए और शिशु को अपने साथ ले गए। उस बच्चे का नाम नंदी रखा गया. एक बार ऋषि शिलाद के घर पर दो सन्यासी पहुंचे। उनका खूब आदर सत्कार किया गया। इससे प्रसन्न होकर सन्यासियों ने ऋषि शिलाद को दीर्घ आयु का आशीर्वाद दिया किंतु नंदी के लिए एक शब्द भी नहीं बोला. ऋषि शिलाद ने सन्यासियों से इसका कारण पूछा। तब सन्यासियों ने बताया कि नंदी की आयु अल्प है, इसलिए हमने इसे कोई आशीर्वाद नहीं दिया । यह बात सुन कर बालक नंदी ने अपने पिता ऋषि शिलाद से कहा कि- आप चिंता ना करें, मेरा जन्म भगवान शिव की कृपा से हुआ है और वे ही मेरी रक्षा करेंगे। इसके बाद नंदी भगवान शिव की स्तुति करने लगे। नंदी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और नंदी को अमृत प्रदान कर अपना कृपापात्र व गणप्रमुख नियुक्त किया। उन्होंने नंदी का शुद्ध भक्ति भाव देख उसे अपना वाहन होने का सौभाग्य भी दिया। इसके बाद से भगवान शिव से अभिन हो उनके साथ ही पूजे जाने लगे।

▶महाशिवरात्रि की कथालगभग 4 मिनट
▶देवी सती की कथालगभग 3 मिनट
▶शिव ने जटा से वीरभद्र को प्रकट कियालगभग 1 मिनट
▶दक्ष के उद्धार हेतु ब्रह्मा और ऋषिलगभग 1 मिनट
▶भगवान शिव द्वारा दक्ष का पुनर्जीवनलगभग 1 मिनट
▶देवी पार्वती के जन्म की कथालगभग 9 मिनट
▶भगवान शिव तपस्या के लिए हिमालय आएलगभग 1 मिनट
▶कामदेव भगवान शिव की ध्यानस्थ अवस्था को भंग करने का प्रयास करते हैंलगभग 1 मिनट
▶भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दियालगभग 1 मिनट
▶सप्त ऋषियों ने पार्वती की परीक्षा लीलगभग 1 मिनट
▶भगवान शिव ने पार्वती की परीक्षा लीलगभग 1 मिनट
▶पार्वती ने भगवान शिव को अपनी सखियों से परिचित करायालगभग 4 मिनटपूरी यात्रा →