पार्वती ने भगवान शिव को अपनी सखियों से परिचित कराया
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 4 मिनट · Parvati Introduces Shiva to Her Friends
देवी पार्वती के शिव समर्पण और उनके कठोर तप से प्रसन्न हो भगवान शिव ने देवी पार्वती के समक्ष उपस्थित होने का विचार किया । किन्तु वे सहज रूप से उपस्थित नहीं हो कर ब्राह्मण का रूप धारण कर के आए। माता अपनी सखियों के साथ थी। उन्होने ब्राह्मण रूपधारी शिव से उनका परिचय और प्रयोजन पूछा, भगवान शिव ने भी देवी से उनका परिचय पूछा। तब देवी पार्वती की सखी विजया ने जटाधारी तपस्वी रूप धरे शिव से कहा साधो ! तुमसे पार्वती के उत्तम चरित्र का और इनकी तपस्या के समस्त कारणों का वर्णन करती हूँ। मेरी सखी गिरिराज की पुत्री हैं। ये पार्वती और काली नामसे विख्यात हैं तथा माता मेनका की कन्या हैं। ये अविवाहित हैं तथा भगवान् शिवके सिवा दूसरे किसीको चाहती भी नहीं। उन्हींके लिये तीन हजार वर्षों से ये तपस्या कर रही हैं। ये पिनाकपाणि भगवान् शंकरको ही पतिरूप में प्राप्त करना चाहती हैं और नारदजीके आदेश से यह कठोर तपस्या कर रही हैं। देवी पार्वती ने भी अपने पिछले जन्म के सती रूप की कहानी दविजरूप ले कर आए शिव जी को बताई। वे यह भी बोली कि वे शिव के बिना अत्यंत दुखी हैं। मैंने साक्षात पतिभाव से शिव का वरण किया है। तब जटाधारी ब्राह्मण का रूप धरे शिव देवी पार्वती से कहते हैं शिव तो भिखारी है, कपालधारी, निर्धन है। उसकी जाति, विद्या और ज्ञान का कुछ पता नहीं है। वो ये भी कहते हैं कि तुम्हारे अंग में चंदन और शिव-शरीर में चिता भस्म होने से वो किसी भान्ति तुम्हारे योग्य नहीं है। यह सुन कर देवी पार्वती रोष में आ जाती है और ब्राह्मण को फटकार के वहाँ से अन्यत्र चले जाने को उन्मुख होती हैं। किन्तु वे जैसे ही विपरित दिशा में जाने के लिए पैर उठाती हैं, भगवान शिव साक्षात स्वरूप से प्रकट होकर उनका हाथ पकड़ लेते हैं। तथा स्वयं को देवी पार्वती की तपस्या के मोल खरीदा देवी का दास बताते हैं। देवी पार्वती और शिव महादेव का वैवाहिक जीवन अत्यंत आनंद के साथ व्यतीत हो रहा था । वैरागी शिव भी देवी के साथ गृहस्थ के कर्तव्य निभा रहे थे। साधना और गृहस्थी के कार्यों से बचे अतिरिक्त समय में वे क्रीड़ाओं का भी आनंद लिया करते थे। ऐसे ही एक समय में देवी ने एक नये खेल की रचना की। पासों से खेले जाने वाले इस खेल को हम चौसर के नाम से जानते हैं। इसकी उत्पत्ति देवी पार्वती तथा शिव जी से ही सम्बद्ध मानी जाती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने अपने आराध्य तथा पति भगवान महादेव से पूछा कि प्रभु, कृपा करके आप ये बताइए कि जब भी आप समाधि में लीन होते हैं उस समय आप किसका ध्यान कर रहे होते हैं? आप स्वयं सर्वेश्वर हैं तब क्या आपके भी कोई इष्ट देव हैं ? यदि हैं तो वे कौन हैं? अपनी पत्नी का ऐसा प्रश्न सुनकर भोलेनाथ महादेव मुस्कुराये और बोले प्रिये, मैं प्रभु राम के नाम का स्मरण करता हूं। ये उत्तर सुन कर माता पार्वती ने पुनह महादेव से पूछा - श्री राम तो अवतार हैं, वे श्री हरि विष्णु के अनेक अवतारों में से एक अवतार हैं, तो आप श्री विष्णु का स्मरण न करके प्रभु राम का स्मरण क्यों करते हैं? देवी के अबोध मन के ओले भाव पर देवाधीदेव महादेव मन ही मन मुस्कुरा कर बोले - हे देवी! इसके लिए तुम्हें प्रभु राम के नाम का माहात्म्य जानना होगा। मैं राम नाम का स्मरण इसलिये करता हूँ क्योंकि राम का एक नाम श्री हरि विष्णु के एक सहस्त्र नामों के समान हैं।

▶भगवान कार्तिकेय के जन्म की कथालगभग 4 मिनट
▶देवी पार्वती ने अग्नि देव को श्राप दियालगभग 1 मिनट
▶छह कृतिकाओं ने एक बालक को जन्म दियालगभग 1 मिनट
▶श्री गणेश कथालगभग 5 मिनट
▶ब्रह्मा ने त्रिपुरासुर राक्षस को वरदान दियालगभग 2 मिनट
▶ब्रह्मा और ऋषि त्रिपुरासुर के कारण अपनी कठिनाई पर चर्चा करने आएलगभग 1 मिनट
▶अन्धकासुर की कथालगभग 2 मिनट
▶मंगलनाथ की कथालगभग 1 मिनट
▶ऋषि पिप्पलाद की कथालगभग 5 मिनट
▶भगवान शिव ने भगवान ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काट दियालगभग 3 मिनट
▶विष्णु और ब्रह्मा के बीच महायुद्धलगभग 3 मिनट
▶बाणासुर की कथालगभग 2 मिनटपूरी यात्रा →