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अन्धकासुर की कथा

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Story of Andhakasur

महादेव तथा माता पार्वती की संतान के रूप में हम मुख्यतः देवताओं के सेनापति भगवान् कार्तिकेय तथा मंगलमूर्ति श्री गणेश का ही नाम जानते हैं किन्तु उनका एक पुत्र असुर भी हुआ, जिसका नाम अंधक था। अंधकासुर के जन्म की कथा बड़ी विचित्र है। कथा कुछ यूँ है - एक बार भगवन शिव और माता पार्वती भ्रमण करते हुए काशी पहुंचे। वहां भगवान शिव अपना मुँह पूर्व दिशा की और करके बैठे थे। तभी पार्वती ने क्रीड़ा में अपने हाथों से भगवान् शिव की आँखों को बंद कर दिया। किन्तु ऐसा करने से पूरे संसार में अँधेरा छा गया। तब संसार को अंधकार से बचाने के लिए भगवान् शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया, इस से संसार में पुनः रौशनी तो हो गई किन्तु तीसरे नेत्र की ऊष्मा से देवी पार्वती को पसीना आ गया। पसीने की उस बूँद से एक बालक प्रकट हुआ। उस बालक का मुँह बहुत भयंकर था। देवी पार्वती ने उसे देखकर भगवान् शिव से उसकी उत्पति के विषय में पूछा। भगवान् शिव ने उसका परिचय स्वयं तथा देवी के पुत्र के रूप में दिया। अंधकार में उत्पन्न होने की वजह से उसका नाम अंधक पड़ा। उसकी वृतियां भी आसुरी थीं अतः संसार में वो अंधकासुर के नाम से जाना गया।

अन्धकासुर की कथा
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