मंदिर व स्थान ›पट्टिका 301 · पड़ाव 41 / 141

नंदी द्वार

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · Nandi Dwar

मंदिर परम्परानुसार प्रत्येक शिवालय के प्रवेश द्वार पर नंदी स्थापित होते हैं जिनके दर्शन के साथ ही मंदिर में प्रवेश होता है। इसी नियम तथा भगवान् महाकाल के दर्शनार्थ जाने वाले श्रद्धालुओं की श्रद्धा को दृष्टिगत रखते हुए महाकाल पथ का प्रवेशद्वार महाकाल के प्रिय भक्त तथा वाहन नंदी को समर्पित किया गया है। भगवान् भोलेनाथ के वाहन नंदी उन्हें समस्त लोकों की यात्रा कराते हैं , शिव के निवास कैलाश पर्वत के द्वारपाल बन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं तथा शिवभक्तों की प्रार्थना शिव तक पहुंचाते हैं। नंदी को ना सिर्फ उनके भक्त के रूप में बल्कि वास्तविक आत्मा अथवा जीवनमुक्ता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है । नंदी को शक्ति-संपन्नता और कर्मठता का प्रतीक भी माना जाता है । नंदी एक वृषभ, अर्थात बैल हैं और वृषभ के लिए कहा गया है - वृषं भाष्यति इति वृषभ - जो सही कर्मों, उनके परिणामों और सभी धर्मों को प्रकाशित करता है वह वृषभ है । इस प्रकार वृषभ 'सर्वश्रेष्ठ' का प्रतीक है। अमरकोश के अनुसार भी वृषभ शब्द श्रेष्ठ का वाचक होता है। प्रसिद्ध पुंगव शब्द का अर्थ नरवृषभ है, जो कि नृसिंह व नरकेसरी के समान ही महानजनों के लिए प्रयुक्त होता रहा है । संस्कृत में ‘नन्दि’ का अर्थ होता है प्रसन्नता अथवा आनन्द । नंदी को देवी पार्वती से भगवान शिव द्वारा सिखाई गई अग्नि और तांत्रिक विद्या का दिव्य-ज्ञान प्राप्त हुआ था। उन्होंने यह दिव्य-ज्ञान अपने आठ शिष्यों (नंदी, नंदिनाथ सम्प्रदाय के आठ शिष्यों अर्थात् सनक, सनातन, सनंदना, सनतकुमारा, तिरुमुलर, व्यग्रपदा, पतंजलि और शिवयोग मुनि, के प्रमुख गुरू माने जाते हैं।) को सिखाया नंदी ने सनक, सनातन, सनन्दन, सनत्कुमार, तिरुमूलर, व्याघ्रपाद, पतंजलि, और शिवयोग मुनि को देवी पार्वती द्वारा सिखाई गई विद्या का दिव्य-ज्ञान प्रदान किया था। इसलिए नंदी को शैव मत के नंदिनाथ सम्प्रदाय के प्रमुख का स्थान प्राप्त है। नंदी जी के इन समस्त गुणों के ध्यान एवं धारणा का प्रयास करते हुए आइये हम नंदीद्वार में प्रवेश कर महाकाल पथ की ओर बढ़ते हैं।

नंदी द्वार
सुनेंआवाज़
Developed by Satyarth Shukla