महर्षि भरद्वाज
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Maharishi Bharadwaj
सप्तर्षियों में भारद्वाज ऋषि तृतीय हैं, इनके पिता देवगुरु बृहस्पति तथा पुत्र द्रोणाचार्य थे। यह महर्षि वाल्मीकि के शिष्य थे। भगवान ब्रह्मा, देवगुरु बृहस्पति एवं देवराज इंद्र के बाद ऋषि भारद्वाज चौथे व्याकरण प्रवक्ता थे । गुरुकुल की स्थापना करके सहस्त्रों वर्षों तक वे विद्यादान करते रहे, वैदिक ऋषियों में महर्षि भारद्वाज को सम्माननीय स्थान प्राप्त है । अथर्ववेद में ऋषि भारद्वाज से सम्बन्धित 23 मंत्र हैं तथा ऋग्वेद में भी भारद्वाज रचित मंत्र प्राप्त किये जाते हैं । भारद्वाज ऋषि ने व्याकरण, आयुर्वेद, धनुर्वेद, राजनीतिशास्त्र,अर्थशास्त्र आदि विषयों पर ग्रंथों की रचना की। यंत्रसर्वस्व अर्थात् विमान अभियांत्रिकी ऋषि भारद्वाज द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ है । भारद्वाज संहिता भी ऋषि भारद्वाज के द्वारा रचित ग्रंथ है, ऋषि भारद्वाज खांडल विप्र समाज के अग्रज है तथा भारद्वाज गोत्र लिखने वाले सनातनी स्वयं को महर्षि भारद्वाज के वंशज मानते हैं। मान्यता ये भी है कि भारद्वाज ने ही प्रयागराज बसाया था।












