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महर्षि विश्वामित्र

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Maharishi Vishwamitra

सप्तर्षियों में विश्वामित्र जी को चतुर्थ स्थान प्राप्त है उन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी और वे त्रेता युग में श्री राम और लक्ष्मण के गुरु थे, तथा वे ही दशरथपुत्रों को अपने साथ देवी सीता व उनकी बहनों के स्वयंवर में ले कर गए थे । ऋषि धर्म ग्रहण करने से पूर्व विश्वामित्र बड़े पराक्रमी और प्रजा वत्सल राजा थे । किन्तु अपने अद्भुत तपोबल से आपने महर्षि की उपाधि अर्जित की थी । विश्वामित्र की तपश्चर्या का बल इतना था कि उन्होंने एक पृथक सृष्टि की सर्जना आरम्भ कर दी थी । विश्वामित्र जब तपस्या कर रहे थे तब मेनका नाम की अप्सरा ने इनका तप भंग किया था । कविकुलगुरु कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशाकुंतलं की नायिका शकुंतला महर्षि विश्वामित्र की पुत्री थीं ।

महर्षि विश्वामित्र
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