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महर्षि अत्रि

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Maharishi Atri

महर्षि अत्रि का नाम सप्तऋषि क्रम में दूसरे स्थान पर आता है । ऋग्वैदिक ऋषि अत्रि का उल्लेख रामायण में प्राप्त होता है, अयोध्या नरेश श्री राम वनवास के समय अपने पत्नी और बंधु लक्ष्मण के साथ अत्रि ऋषि के आश्रम चित्रकूट में गए थे। अत्रि ऋषि की पत्नी सती अनुसूया थीं जिन्हें सोलह सतियों में से एक माना जाता है । सती अनुसूया ने अपने तपोबल से ब्रह्मा जी, श्री विष्णु तथा भगवान महेश को शिशु बना दिया था । तदुपरांत तीनों देवों ने ऋषि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र के रूप में जन्म लिया । भगवान ब्रह्मा को चंद्रदेव , विष्णु जी को भगवान दत्तात्रेय और भगवान शिव को ऋषि दुर्वासा के रूप में सती अनुसूया और अत्रि ऋषि ने पुत्र रूप में प्राप्त किया । कहा जाता है कि एक बार अत्रि ऋषि ने एक अंजलि में पानी भरकर समुद्र को सोख लिया था। कृषि विकास में ऋषि अत्रि का योगदान उल्लेखनीय माना जाता है , कहा जाता है कि यह सिंधु नदी पार करके पारस यानी आज के इराक चले गए थे जहां इन्होंने हिंदू धर्म और यज्ञ परम्परा का प्रचार किया । तथा अत्रि ऋषि के कारण ही पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ ।

महर्षि अत्रि
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