क्षिप्रा की उत्पत्ति कथा
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Origin of the Kshipra
क्षिप्रा नदी की उत्पत्ति की कथा पोषण तथा जीवन देने में सक्षम नदियों को सनातन संस्कृति में माता का स्थान प्राप्त है। हमारे समस्त तीर्थ, मठ और प्राचीन नगर नदियों के तट पर बसे हुए हैं। पौराणिक मान्यता अनुसार नदियाँ पुण्य ही नहीं बल्कि मोक्ष तक देने में सक्षम हैं। ऐसी ही एक नदी है क्षिप्रा, जिसके किनारे महाकाल की नगरी उज्जैन बसी हुई है । मोक्षदायिनी क्षिप्रा की उत्पत्ति के संबंध में दो पौराणिक कथाएँ प्राप्त होती हैं। प्रथम कथा के अनुसार बहुत समय पहले भगवान शिव ब्रह्मकपाल लेकर भगवान विष्णु से भिक्षा मांगने विष्णुलोक पहुंचे। तब भगवान विष्णु ब्रह्मकपाल को देख तनिक अप्रसन्न हुए, उन्होंने भिक्षा की आशा से अपने द्वार पर आए भगवान शिव को भिक्षा तो दी किन्तु अंगुली दिखाते हुए। इस पर भगवान भोलेनाथ ने अपने त्रिशूल से विष्णु जी की उस अंगुली पर प्रहार कर दिया। श्रीहरि विष्णु की उस अंगुली से उसी क्षण रक्त की एक धारा बह निकली और विष्णुलोक से पृथ्वीलोक पर आ पहुंची। यही धारा पृथ्वीलोक में अवंतिका क्षेत्र में बहने वाली तथा श्रद्धालुओं को मोक्ष प्रदान करने वाली क्षिप्रा कहलाई । अन्य कथा कुछ यूं है - पुरातन काल में ऋषि अत्रि ने अवंतिकापुरी में सहस्त्रों वर्षों तक तप किया । तप पूरा होने पर जब ऋषि अत्रि ने अपनी आंखें खोली तो पाया कि उनके तन से दो जलधाराएं बह रही हैं। इनमें से एक जलधारा ने अंतरिक्ष की ओर जाकर चंद्रमा का रुप ले लिया और दूसरी जलधारा भूमि की ओर बह गई। इसी दुसरी जलधारा से क्षिप्रा नदी की उत्पत्ति हुई ।

▶नंदी द्वारलगभग 3 मिनट
▶कमल सरोवरलगभग 1 मिनट
▶सप्तऋषि मण्डल एवं शिव स्तम्भलगभग 6 मिनट
▶किंगडम ऑफ़ लार्ड शिवालगभग 1 मिनट
▶नवग्रह मंडललगभग 7 मिनट
▶नीलकंठ महादेव और समुद्र मंथनलगभग 4 मिनट
▶भैरव मंडपमलगभग 6 मिनट
▶त्रिपथ मंडपमलगभग 1 मिनट▶भगवान शिव का शृंगार 1लगभग 1 मिनट▶भगवान शिव का शृंगार 2लगभग 1 मिनट
▶वीरभद्र द्वारा दक्ष का सर काटनालगभग 1 मिनट
▶महर्षि भरद्वाजलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →