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किरात रूप कथा

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Story of Shiva as Kirata

महाभारत के अनुसार जब कौरवों ने छल कपट से पांडू पुत्रों का राजपाट छीन लिया और हर संभव प्रयास के बाद भी जब युद्ध होना तय ठहरा तब पांडुपुत्र अर्जुन विशेष अस्त्रों के अर्जुन हेतु निकल पड़े । इसी प्रक्रिया में अर्जुन महामुनि व्यास द्वारा बताई गई विधि से शिवजी की उपासना कर रहे थे। लंबे समय तक तपस्या करने के पश्चात उनके तप का तेज बढ़ना आरम्भ हो गया। उनके तप के प्रभाव से सभी प्राणी, जीव-जंतु और देवता दग्ध होने लगे। अर्जुन की इस घोर तपस्या के विषय में दुर्योधन को ज्ञात हुआ। उसने मूक नाम के दैत्य को अर्जुन के पास शूकर का भेष धारण करके भेजा। वह दुष्ट राक्षस अनेक प्रकार की ध्वनि निकालता और वृक्षों को उखाड़ता हुआ अर्जुन के तप के स्थान के निकट पहुंचा। तब अर्जुन अपना ध्यान भंग होने से क्रोधित हो उस पर बाण चला दिया। उसी समय देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती भीली किरात का वेश धारण कर वहां आए । अर्जुन के बाण के साथ ही शिव जी ने भी उसी शुकर पर बाण चलाया । भयानक शब्द करता हुआ वह शूकर रूपी असुर धरती पर गिर पड़ा और उसके प्राण पखेरू उड़ गए। किंतु उसे किसने मारा इस पर अर्जुन और किरात रूप धारी शिव में विवाद शुरू हो गया। विवाद युद्ध में परिणत हो गया। युद्ध में अर्जुन ने देखा कि वह किसी भी प्रकार से उस किरात को अपने वश में नहीं कर पा रहे हैं तो उन्होंने भगवान शिव की स्तुति की। इसके प्रभाव से तुरत ही त्रिलोकीनाथ, भक्‍तवत्सल, कल्याणकारी शिवजी तथा शक्ति स्वरूपा माता पार्वती ने अपने असल रूप के दर्शन अर्जुन को कराए और युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया।

किरात रूप कथा
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