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मंगलनाथ की कथा

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · The Story of Mangalnath

इन्द्र ने उज्जयिनी में शासन करने वाले अंधकासुर के पुत्र कनकदानव को युद्ध में मार गिराया था। फिर अंधकासुर के प्रतिशोध के भय से वे भगवान शंकर को ढूँढते हुए कैलाश पर्वत पर चले गये। वहाँ देवराज इंद्र ने भगवान चंद्रशेखर के दर्शन कर अपनी अवस्था उन्हें बताई और प्रार्थना की- “भगवन ! मुझे अंधकासुर से अभय दीजिए।" इन्द्र का वचन सुनकर शरणागत वत्सल शिव ने इंद्र को अभय प्रदान किया और अंधकासुर को युद्ध के लिए ललकारा। अत्यंत घमासान युद्ध हुआ, युद्ध में रत भगवान शिव के मस्तक से पसीने की एक बूंद पृथ्वी पर गिरी, जिससे अंगारे के समान लाल अंग वाले बालक का जन्म हुआ। भूमि से उत्पन्न होने के कारण यह शिव पुत्र भौम कहलाया । मंगल, धरात्मज, भूमिनंदन, अंगारक, रक्ताक्ष तथा महादेव पुत्र इन नामों से स्तुति कर ब्राह्मणों ने इसे ग्रहों के मध्य प्रतिष्ठित किया। तत्पश्चात मंगल के जन्म स्थान पर ब्रह्मा जी ने एक शिवलिंग की स्थापना की। वर्तमान में यह स्थान मंगलनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, जो उज्जैन के उत्तर में शिप्रा के किनारे पर स्थित है।

मंगलनाथ की कथा
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