माता अनुसईया की कथा
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · The Story of Mata Anusuya
एक बार देवी ब्रह्माणी, देवी लक्ष्मी और माता गौरी में यह विवाद छिड़ा कि सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता स्त्री कौन है ? अंत में तय यहीं हुआ कि ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया ही सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता हैं। त्रिदेवीयों के अनुरोध पर इस तथ्य की परीक्षा लेने के लिये त्रिमूर्ती परमपिता ब्रहमा, श्री हरि विष्णु व भगवान शंकर ब्राहमण के वेश में ऋषि अत्रि के आश्रम पहुँचे। अत्रि ऋषि किसी कार्यवश बाहर गये हुए थे। माता अनसूया ने अतिथियों के रूप में पधारे त्रिदेव का बड़े आदर से स्वागत किया। तीनों ने देवी अनसूया से कहा कि हम भोजन लेंगे किन्तु आपके हाथ से तभी लेंगे जब आप निर्वसन होकर भोजन देंगी। सती अनुसूया बड़े धर्म-संकट में पड़ गयीं। वह भगवान को स्मरण करके बोलीं "यदि मैंने पति के समान कभी किसी दूसरे पुरुष को न देखा हो, यदि मैंने किसी भी देवता को पति के समान न माना हो, यदि मैं सदा मन, वचन और कर्म से पति की आराधना में ही लगी रही हूँ तो मेरे इस सतीत्व के प्रभाव से ये तीनों अतिथि नवजात शिशु हो जाएं। तुरंत ही तीनों देव नन्हे शिशु होकर रूदन करने लगे । देवी अनुसूय के आँचल में दूध उतर आया। उन्होंने उन तीनों को गोदी में ले कर स्तनपान कराया और उन्हें उनकी माँग अनुसार भोजन करा के तृप्त करने के साथ ही अपने सतित्व की भी रक्षा की। इधर तीनों देवियों ने जब देखा कि देवी अनुसूय की परीक्षा लेने के लिए गए हमारे पति लौटे नहीं हैं तो वे चिन्तित हो गयीं। आखिर तीनों अपने पतियों का पता लगाने के लिये चित्रकूट स्थित ऋषि अत्रि के आश्रम पहुँची। संयोग से वहीं नारद जी से उनकी मुलाक़ात हो गयी। त्रिदेवियों ने उनसे अपने पतियों का पता पूछा। नारद ने कहा कि वे लोग तो अत्रि आश्रम में बालक बनकर खेल रहे हैं। तीनों देवियाँ अत्रि आश्रम पहुँची । अनुसूया जी ने उनसे उनका परिचय पूछा। त्रिदेवियों ने कहा- 'माता जी! हम तो आपकी पुत्र वधु हैं। आप हमें क्षमा कर दें और हमारे पतियों को लौटा दें।' अनुसूया जी का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने बच्चों पर जल छिड़ककर उन्हें उनका पूर्व रूप प्रदान किया और अन्तत: उन त्रिदेवों की पूजा-स्तुति की। त्रिदेवों ने प्रसन्न होकर अपने-अपने अंशों से अनुसूया के यहाँ पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया।

▶किरात रूप कथालगभग 2 मिनट
▶चंचुला की कथालगभग 1 मिनट
▶क्षिप्रा की उत्पत्ति कथालगभग 2 मिनट
▶नंदी द्वारलगभग 3 मिनट
▶कमल सरोवरलगभग 1 मिनट
▶सप्तऋषि मण्डल एवं शिव स्तम्भलगभग 6 मिनट
▶किंगडम ऑफ़ लार्ड शिवालगभग 1 मिनट
▶नवग्रह मंडललगभग 7 मिनट
▶नीलकंठ महादेव और समुद्र मंथनलगभग 4 मिनट
▶भैरव मंडपमलगभग 6 मिनट
▶त्रिपथ मंडपमलगभग 1 मिनट▶भगवान शिव का शृंगार 1लगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →