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शिव ने सती को आशीर्वाद दिया

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 4 मिनट · Shiva Blesses Sati

भगवान शिव के प्रति ये मान्यता है कि वे सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं और इसीलिये उनका एक नाम भोलेनाथ भी है। किन्तु देवी सती को उन्हें पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या करनी पड़ी थी । देवी सती ने अपनी बाल्यावस्था का कुछ समय अपनी माता के साथ भगवान शिव के परम भक्त महर्षि दधीचि के आश्रम में व्यतीत किया था। तब महर्षि दधीचि ने शिव जी के वैशिष्य से नन्ही सती का परिचय कराया । शिव से अपनी अनन्यता के कारण सती में शिव के प्रति अगाध श्रद्धा, प्रेम व विश्वास पल्लवित होने लगा। अतएव सती रूपिणी परमेश्वरी ने अपनी माता से भगवान शिव को प्रसन्न करने के उ‌द्देश्य से तपस्या करने की आज्ञा मांगी। माता ने पुत्री को आशीर्वाद सहित आज्ञा प्रदान की। तब सती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप आरंभ किया। माह तथा तिथि अनुसार स्नान, पूजन, व्रत, पुष्प नैवेद्रद्य आदि का अर्पण करते हुए देवी सती विधिपूर्वक शिव की आराधना में संलग्न रहीं । देवी सती की इस तपश्चर्या को देखने के लिए श्रीहरि विष्णु सहित समस्त देवता और ऋषिगण पहुँचे। भगवान शिव के ध्यान में निमग्न हो देवी सती सि‌द्धावस्था को प्राप्त कर गई थीं। श्रद्धा और सम्मान के साथ देवताओं ने हाथ जोड़कर सती को नमस्कार किया । अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर ध्यानमग्न सती को भगवान शिव ने प्रत्यक्ष दर्शन दिए । उनके उन्नत भालदेश में चन्द्रदेव शोभायमान हो रहे थे। गौरवर्णी शिव के कण्ठ में नील चिह्न बहुत सुन्दर दिखाई पड़ रहे थे। भस्ममय अंगराग से उनका सारा शरीर दमक रहा था। देवी गंगा उनके मस्तक की शोभा बढ़ा रही थीं। वे सात्विक लावण्य के धाम जान पड़ते थे। उनकी अंगकान्ति करोड़ों कामदेवों को तिरस्कृत कर रही थी। सती ने ऐसे सौन्दर्य-माधुर्य से युक्त भगवान शिव को प्रत्यक्ष देखकर उनके चरणों की वन्दना की। वे शिव को देखना चाहती थीं किन्तु लज्जा से उनका मुख उठ न पाता था । भगवान शिव देवी से बोले दक्षनन्दिनि ! मैं तुम्हारे इस तप से बहुत प्रसन्न हूँ। इसलिये कोई वर माँगो। तुम्हारे मन को जो भी अभीष्ट होगा, वही मैं तुम्हें दूंगा। परंतु सती लज्जावश अपनी मनोकामना स्पष्ट शब्दों में कह न सकीं। सो देवी का मन समझ कर भक्तवत्सल भगवान् शिव स्वयं ही उनसे बोले- 'देवि! तुम मेरी भार्या हो जाओ। यह सुन सती अत्यंत प्रसन्न हुई क्योंकि सती अपना मनोवांछित वर प्राप्त कर चुकी थी।

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