राक्षस भस्मासुर के वध की कथा
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · The Story of Bhasmasura
आशुतोष शिव के भक्तों में देवता, मनुष्य, और पशु पक्षी ही नहीं बल्कि असुरों की भी बड़ी संख्या है । अपनी निश्छल और भेद रहित दृष्टि के कारण वे सभी के प्रिय आराध्य देव हैं । उनके एक असुर भक्त की कथा बहुत रोचक है क्योंकि उन्हीं से शक्ति प्राप्त -कर वो उन्हीं के प्राण लेने को आतुर हो गया था ।इस असुर का नाम था भस्मासुर । उसने भोलेनाथ शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की । जब शिवजी उसकी भक्ति से प्रसन्न हो गए तब उन्होंने उसे वरदान मांगने को कहा । भस्मासुर बोला – मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जिस भी किसी के सिर पर हाथ राखू वह भस्म हो जाए। भोलेशंकर ने उसे ये वरदान दे दिया। किन्तु त्रिपुरसुन्दरी देवी पार्वती के अनुपम रूप पर मुग्ध हो उन्हें प्राप्त करने के उद्देश्य से भस्मासुर ने देवी के पति और अपने आराध्य भगवान शिव को उन्हीं के द्वारा दिए गए वरदान के माध्यम से समाप्त करने की ठानी। वो भगवान शिव के सिर पर हाथ रख कर उन्हें भस्म करने चला । शिव जी के दिए वरदान की कोई काट नहीं होती है, स्वयं शिव जी के पास भी नहीं । अतह: वे भस्मासुर से स्वयं को बचाने के लिए वहाँ से भागने लगे । सृष्टि संचालक श्रीविष्णु ने भी यह देख कर भस्मासुर के चरित्र की निर्बलता को ही उसके नाश का कारण बनाने की योजना बनाई। वह अपने मोहिनी अवतार में अत्यंत सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर उसके पास पहुंचे। वह जानते थे कि भस्मासुर चारित्रिक रुप से कमजोर है और मोहिनी के रूप से उसे सरलता से मुग्ध कर वश मैं किया जा सकता है । मोहिनी के सम्मोहन से भस्मासुर क्षण कर में सुध खो बैठा । मोहिनी रूपधारी भगवान विष्णु से वह प्रणय निवेदन करने लगा । मोहिनी ने भस्मासुर से कहा - मैं उसी पुरुष का प्रणय निवेदन स्वीकार करूँगी जो मेरे समान नृत्य कर सकता हो । भस्मासुर बोला - सुन्दरी, तुम्हें पाने के लिए जो भी करना पड़े मैं करूंगा । मोहिनी - तो मेरे संग नृत्य कर के अपनी योग्यता सिद्ध करो । जैसे जैसे मैं करें, वैसे वैसे ही तुम्हें कर के दिखाना होगा। मोहिनी ने यह कह कर नृत्य आरम्भ किया , भस्मासुर आशा और आनंद से भर कर मोहिनी की नृत्यमुद्राओं की नकल करने लगा। मोहिनी ने विभिन्न मुद्राओ में नृत्य करते हुए एक मुद्रा में अपने सिर पर हाथ रख लिया। चरित्र से कमजोर , सौंदर्य से सम्मोहित भस्मासुर ने भी मोहिनी को देख , बिना विचार किए अपने सिर पर हाथ रख लिया । शिव जी के वरदान के फलस्वरूप भस्मासुर ऐसा करते ही भस्म हो गया। भस्मासुर वध की यह कथा हमें कुछ भी देने से पहले उस व्यक्ति की पात्रता देखने का एवम, जिससे कुछ भी प्राप्त किया हो उसके प्रति सदा कृतज्ञ रहने का तथा चरित्र से दृढ़ रहने का संदेश देती है ।

▶शिव ने सती को आशीर्वाद दियालगभग 4 मिनट
▶नारद का भ्रमलगभग 6 मिनट
▶सुदर्शन चक्र प्रसंगलगभग 1 मिनट
▶नंदी की कहानीलगभग 2 मिनट
▶महाशिवरात्रि की कथालगभग 4 मिनट
▶देवी सती की कथालगभग 3 मिनट
▶शिव ने जटा से वीरभद्र को प्रकट कियालगभग 1 मिनट
▶दक्ष के उद्धार हेतु ब्रह्मा और ऋषिलगभग 1 मिनट
▶भगवान शिव द्वारा दक्ष का पुनर्जीवनलगभग 1 मिनट
▶देवी पार्वती के जन्म की कथालगभग 9 मिनट
▶भगवान शिव तपस्या के लिए हिमालय आएलगभग 1 मिनट
▶कामदेव भगवान शिव की ध्यानस्थ अवस्था को भंग करने का प्रयास करते हैंलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →