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देवी सती के जन्म की कथा

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Birth of Goddess Sati

पुराणों के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक प्रजापति दक्ष हिमालय क्षेत्र में निवास करते थे।प्रजापति दक्ष तथा उनकी पत्नी देवी प्रसूति माता आघशक्ति के अनन्य भक्त थे। वे चाहते थे कि स्वयं आध्या शक्ति जगन्माता उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें । इसके लिए राजा दक्ष व उनकी पत्नी घोर तप करने लगे.तप करते हुए जब कई दिन बीत गए तब प्रजापति दक्ष व देवी प्रसूति के तप से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें दर्शन दिए और कहा, “मैं तुम्हारे तप से अत्यंत प्रसन्न हूँ, अतह तुम्हारी इच्छा अनुसार मैं स्वयं तुम्हारे यहां तुम्हारी पुत्री के रूप में जन्म लूंगी।" इसके कुछ समय पश्चात देवी प्रसूति ने गर्भ धारण किया । फिर वह दिन भी आया जब पराम्बिका का जन्म हुआ । देवी के जन्म पर समस्त संसार आल्हादित हुआ। चराचर जगत अपना उत्साह विविध तरह से प्रकटकर रहा था। शीतल, मन्द और सुगंधित पवन बह रहा था । वन उपवन में पुष्प पल्लवित हो रंग बिखेर रहे थे नदियाँ आनंद से वेगवान हो अमृत की धारा बहा रही थीं। आकाश देवताओं के समूहों से भरा हुआ था। ऐसे मनोहारी वातावरण में पराम्बा देवी शक्ति ने धरती पर जन्म लिया। देवी का रूप अनुपम था, उनका नाम माता पिता द्वारा बड़े प्रेम से 'सती' रखा गया ।

देवी सती के जन्म की कथा
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