पंचमुखी हनुमानजी (आसन 2)
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Panchmukhi Hanumanji, Second Posture
हनुमान जी के इस दिव्य स्वरूप का वर्णन हनुमद्गह्वर आगम, कृतिबास रामायण, उत्कल रामायण, हनुमदोपासना अध्याय आदि ग्रन्थों में प्राप्त होता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार राम-रावण युद्ध के दौरान रावण के भ्राता अहिरावण तथा महिरावण द्वारा श्रीराम तथा लक्ष्मण का अपहरण कर लिया गया। अहिरावण तथा महिरावण माँ देवी को राम तथा लक्ष्मण की बलि देकर प्रसन्न करना चाहते थे। इस बात का ज्ञान जब श्री हनुमान जी को होता है तो वे पाताल लोक में जाते हैं। पाताललोक के द्वार पर प्रथम मकरध्वज का पराभव करते हैं। तत्पश्चात् देवी का विसर्जन कर अपने पंचमुख रूप को धारण कर अहिरावण तथा महिरावण का संहार करते हैं। इस प्रकार श्रीराम एवं लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए हनुमान जी द्वारा पंचमुख अवतार ग्रहण किया गया। पंचमुख हनुमान जी के पांच मुख तथा दश भुजाएं है। जो अपने भीतर रहस्य को गर्भित किये हुए है। इनका प्रथम वराह मुख भक्तों को समस्त प्रकार के रोगों तथा व्याधियों का नाश करने वाला है। यह मुख अपने भक्तो विविध प्रकार की निधियां तथा धन-सम्पत्ति प्रदान करने वाला है। इनका द्वितीय मुख नरसिंह का है। नरसिंह मुख समस्त प्रकार के भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, झोटिंग, वेताल, अपस्मार आदि से रक्षा कर अभय प्रदान करने वाला है। हनुमान जी का तृत्य मुख कपि अर्थात् वानर का है। यह मुख भक्तों के समस्त प्रकार के भय, कष्टों का नाश करने वाला हैं। इनका चतुर्थ मुख गरूड़ का है। गरुड़ मुख सर्प, वृच्छिक आदि विषैले जन्तुओं से अपने भक्तों की रक्षा करने वाला है। इनका पाँचवाँ मुख हयग्रीव का है जो अपने भक्तों को समस्त प्रकार की विद्याएं प्रदान कर अन्तकाल मे ब्रह्मविद्या का उपदेश प्रदान करता है।

▶शरभ अवतारलगभग 2 मिनट
▶भगवान अयप्पा: शिव और मोहिनी के पुत्रलगभग 4 मिनट
▶दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)लगभग 1 मिनट
▶गंगा अवतरणलगभग 1 मिनट
▶गजासुर संहारलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री क्रोध भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री भीषण भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री चण्ड भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री असितांग भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री कपाल भैरवलगभग 1 मिनट
▶शिव का हनुमान अवतारलगभग 1 मिनट
▶आदियोगी शिवलगभग 2 मिनटपूरी यात्रा →