गंगा अवतरण
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · The Descent of Ganga
देवी गंगा के स्वर्ग से धरतीलोक पर पदार्पण करने के विषय में प्राप्त अनेक पौराणिक कथाओं में से राजा भगीरथ की कथा प्रमुख हैं . इस कथानुसार प्राचीन समय में इक्ष्वाकुवंश में सगर नामक राजा हुए जिन्होनें अश्वमेध यज्ञ का आयोजन कराया . देवराज इंद्र ने अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम में छिपा दिया. जब सगर के साठ हजार पुत्रों ने घोड़े को कपिलमुनि आश्रम क्षेत्र में पाया तो वे कपिलमुनि को घोडा चुराने का अपराधी बता अपमानित करने लगे। ध्यान मुद्रा में बैठे कपिलमुनि ने क्रोधवश उन सबको योगाग्नि से भस्म कर दिया। कालांतर में उसी वंश में हुए राजा भगीरथ के द्वारा अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से तपस्या किये जाने पर देवी गंगा धरती पर अवतरित हुईं। उनके प्रचंड प्रवाह को धरती अथवा धरती का कोई प्राणी वहन करने में सक्षम ना होने से देवाधिदेव महादेव ने उन्हें अपनी जटा में धारण किया , जहां से वे धरती पर प्रवाहित हुईं। इस तिथि को हम गंगा दशहरा के रूप में मनाते हैं।

▶गजासुर संहारलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री क्रोध भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री भीषण भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री चण्ड भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री असितांग भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री कपाल भैरवलगभग 1 मिनट
▶शिव का हनुमान अवतारलगभग 1 मिनट
▶आदियोगी शिवलगभग 2 मिनट
▶बैठे हुए मुद्रा में गणेशलगभग 1 मिनट
▶नंदिकेश्वरावतारलगभग 2 मिनट
▶अघोर अवतारलगभग 2 मिनट
▶कपालमोचक शिवलगभग 2 मिनटपूरी यात्रा →