अघोर अवतार
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Aghor Avatar
शिवजी के अनेक रूपों में से एक है अघोर रूप । अघोर रूप के विषय में कहा गया है : ॐ अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः । सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः। । जिसका अर्थ है - जो अघोर है, जो घोर है, जो घोर से भी घोरतर है, जो सर्वसंहारी रुद्ररूप है। आपके सभी रूप को मेरा नमस्कार है। शिवपुराण के अनुसार एक बार सृष्टि सर्जक ब्रह्माजी प्रजाओं की सृष्टि करने की इच्छा से विचार करने लगे। उसी समय ब्रह्मा जी के समक्ष एक कुमार उत्पन्न हुआ। उस महापराक्रमी बालक की देह का रंग काला था। वह अपने तेज से उद्दीप्त हो रहा था तथा काला वस्त्र, काली पगड़ी और काला यज्ञोपवीत धारण किये हुए था। उसका मुकुट भी काला था और स्नान के पश्चात् अनुलेपन-चन्दन भी काले रंग का ही था। उन भयंकर पराक्रमी, अलौकिक, कृष्णपिंगलवर्णवाले बालक को देखकर ब्रह्माजी ने उनकी वन्दना की। शिव का यही स्वरुप अघोर था । शैव मान्यता में अघोर पन्चमुखी शिव के दक्षिणी मुख का नाम भी है। सदाशिव के पांच मुखौं में से एक अघोर मुख अग्नि तत्व से सम्बंधित होता है और इसका वर्ण लाल होता है ।समाज में अघोर नाम से एक प्रचलित शैव सम्प्रदाय भी है जिसके अनुयायी भयंकर वेश धारण किए रहते हैं । वे शमशान में रह कर उपासना करते हैं और किसी भी प्रकार के भेदभाव से परे रहते हैं । महादेव शिव की अभेदवादी, समावेशी दृष्टि का परिचायक हैं अघोर अवतार ।

▶कपालमोचक शिवलगभग 2 मिनट
▶कृष्णदर्शन अवतारलगभग 5 मिनट
▶आदियोगी शिव (मुद्रा 2)लगभग 2 मिनट
▶नटराज रंगमंचलगभग 2 मिनट
▶त्रिवेणी संग्रहालयलगभग 3 मिनट
▶सप्तपुरीलगभग 1 मिनट
▶पंचक्रोशी यात्रालगभग 2 मिनट
▶सिंहस्थलगभग 2 मिनट
▶शाही स्नानलगभग 1 मिनट
▶महाकाल शाही सवारीलगभग 1 मिनट
▶चिंतामण गणेशलगभग 2 मिनट
▶अंगारेश्वर महादेवलगभग 2 मिनटपूरी यात्रा →