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चिंतामण गणेश

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Chintaman Ganesha

चिंतामण गणेश मंदिर उज्जैन के तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । इनका उल्लेख स्कन्द पुराण के अवन्ति खण्ड में प्राप्त होता है। चिंतामण गणेश मंदिर में श्री गणपति के तीन रूप प्रतिष्ठित है। यह चिन्तामण गणेश, इच्छागण गणेश और सिद्धिविनायक के रूप में प्रसिद्ध हैं । मान्यता है कि चिंतामण चिंताओं को दूर करते हैं, इच्छामन गणेश इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और सिद्धिविनायक रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं । स्थानीय नोक कथा के अनुसार माता सीता को प्यास लगने पर लक्ष्मण जी ने इस स्थान पर तीर मार कर पृथ्वी रो पानी निकाला और यहाँ एक बावड़ी बन गई। माता सीता ने इसी जल से व्रत की पारणा की थी। मंदिर के सामने आज भी वह बावड़ी स्थित है, जहाँ पर दर्शनार्थी दर्शन करते है। इस मंदिर का निर्माण मूल रूप से परमार काल का है, जिसका जीर्णोद्धार महारानी अहिल्याबाई द्वारा 18 वी शताब्दी में हुआ था । किसी भी धार्मिक आयोजन, शुभकार्य, विवाह इत्यादि का प्रथम निमंत्रण भगवान चिंतामण गणेश को ही दिया जाता है । चैत्रमास की जात्रा तथा तिल महोत्सव इस मन्दिर के प्रमुख उत्सव हैं। जत्रा की शुरुआत चैत्र मास के प्रथम बुधवार से होती हैं और अंतिम बुधवार को इसका समापन होता है। इस उत्सव के दौरान भगवान को विशेष भोग लगाया जाता है।

चिंतामण गणेश
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