नागचंद्रेश्वर
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Nagchandreshwar Temple
नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर महाकालमन्दिर के तृतीय तल पर सम्पूर्ण स्थित है। प्रचलित परम्पराओं के अनुसार इस मन्दिर के पट, वर्ष में केवल नागपंचमी के दिन खुलता है। मध्यरात्रि में विशेष पूजा के बाद मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया जाता है तथा नागपंचमी की समाप्ति पर मध्यरात्रि में इसे पुनः बन्द कर दिया जाता है। इस मंदिर में शिवजी. देवी पार्वती, पुत्र श्रीगणेश जी और कार्तिकेय के साथ नाग के आसन पर विराजित हैं वाहन नंदी और सिंह भी उपस्थित हैं। शिव जी के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं। हर साल नागपंचमी पर लाखों भक्त महाकालेश्वर मंदिर पहुंचते हैं और महाकाल के साथ ही नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि वर्ष भर नागराज तक्षक मंदिर में रहते हैं तथा भगवान शिव का पूजन करते है। नागपंचमी के दिन वे अपने कुटुम्ब से भांट करने नागलोक जाते हैं । अंतः इस एक दिन भक्तगण नागचंद्रेश्वर का दर्शन कर राकते हैं । जब कि अवन्तिका के निकट ही महाकाल वन में लकड़ियो मिल जाती। नारायणा में जलवृष्टि होना यह बात सिद्ध करता है उस घटना के समय सूर्य कर्क राशि में प्रवेश कर रहा होगा। आज भी कर्क राशि में सूर्य के प्रवेश होते ही कर्क रेखा स्थल पर विधिवत ही वर्षा होती है। वैज्ञानिक मत अनुसार गुरु सान्दीपानि ने काल गणना हेतु शिष्यद्वय को कर्क रेखा गमन स्थल पर भेजा होगा।

▶नारायण धामलगभग 1 मिनट
▶हरिहर मिलनलगभग 1 मिनट
▶हरसिद्धि शक्तिपीठलगभग 3 मिनट
▶गढ़कालिकालगभग 2 मिनट
▶काल भैरवलगभग 2 मिनट
▶महर्षि अत्रिलगभग 2 मिनट
▶श्रीरामपितृतर्पणलगभग 1 मिनट
▶श्री राम महाकाल दर्शनलगभग 1 मिनट
▶सान्दिपनी आश्रमलगभग 1 मिनट
▶आदि शंकराचार्य भट्ट भास्कर शास्त्रार्थ उज्जैनलगभग 1 मिनट
▶गुरू नानक देव जी महाराज का उज्जैन आगमनलगभग 1 मिनट
▶राजा इन्द्रद्युम्नलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →