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हरिहर मिलन

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Harihar Milan

प्रतिवर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दर्शी, जिसे वैकुण्ठ चतुर्दशी भी कहा जाता है पर उज्जैन में हरिहर मिलन का पूर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है । इनमे उजैन के राजा भगवान महाकाल मध्यरात्रि. में अपने धाम महाकालेश्वर मंदिर से भगवान श्रीकृष्ण से भेट करने गोपाल मंदिर आते हैं । और प्रात: चार बजे महाकाल की भस्म आरती के समय भगवान श्रीकृष्ण शोभायात्रा के साथ श्री महाकालेश्वर से मिलने उनके स्थान पर कक जाते हैं। हरि अर्थात्‌ श्रीविष्णु एवं हर अर्थात्‌ भगवान शंकर दोनों का सृष्टि के संचालन में स्पष्ट दायित्व हैं। पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान विष्णु जब चारमास योगनिद्रा में लीन रहते हैं, तब उस काल में सृष्टि के पालन का दायित्व भगवान शिव के अधीन होता हैं। देवप्रबोधनी एकादशी को विष्णु जी के जागने पर तीन दिन बाद वैकुण्ठ चौदस को शिवजी फिर से भगवान विष्णु को यह दायित्व सौंपते हैं। इस अवसर पर प्रतीक रूप से तह उन्हें तुलसी दल भेंट करते हैं ।

हरिहर मिलन
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