उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 620 · पड़ाव 127 / 141

राजा इन्द्रद्युम्न

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · King Indradyumna

राजा इंद्रद्युम्न प्राचीन उज्जैन के राजा थे, वह भगवान जगन्नाथ के भक्त थे । ऐसी मान्यता है कि सपने में भगवान जगन्नाथ ने उन्हें दर्शन देकर अपनी मूर्ति की स्थापना के लिया कहा। उन्होंने कड़ी तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्रद्युम्न को बताया कि वह पुरी के समुद्र तट पर जाये । वहाँ एक देवदार लकड़ी का लट्ठा मिलेगा। उसी लकड़ी से वह मूर्ति का निर्माण कराये। राजा ने ऐसा ही किया तब देवताओ के वास्तुशिल्पी श्री विश्वकर्मा मूर्तिकार के रूप में उनके सामने उपस्थित हुए और कहा कि वे एक माह में मूर्ति तैयार कर देंगे किन्तु तब तक वह एक कमरे में बंद रहेंगे और राजा या कोई भी उस कमरे के अंदर न आये। जब कई दिनों तक कोई भी आवाज नहीं आयी तो उत्सुकतावश राजा ने कमरे में झांक लिया वचन भांग होने से विश्वकर्मा द्वार खोलकर बाहर आ गए । मूर्तियों के हाथ अभी नहीं बने थे। राजा के पश्चाताप करने पर मूर्तिकार ने बताया कि यह सब देववश हुआ है और यह मूर्तियां ऐसे ही स्थापित होकर पूजी जायेंगीं। तब वही तीनो मूर्तियाँ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रूप में जगन्नाथ मंदिर में स्थापित की गयीं।

राजा इन्द्रद्युम्न
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