उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 625 · पड़ाव 132 / 141

श्रीकृष्ण- मित्रवृन्दा

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Shri Krishna and Mitravrinda

श्रीकृष्ण का उज्जैन से गहरा संबन्ध है ।उज्जैन श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली होने के साथ-साथ ससुराल भी है। उनकी पत्नी मित्रवृंदा उज्जैन की राजकुमारी थी । भैरोगढ़ पुल के पास इनका मंदिर स्थित है । यहाँ देवी मित्रवृन्दां व श्रीकृष्ण का विग्रह प्रतिष्ठित हैं। श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार मित्र वृंदा अवंती; राज्य के राजा जयसेन की पुत्री थीं, उनके दो भाई थे विंद (विंद्य) और अनुविंद (अनुविंध्यो, जिन्होंने उनके विवाह के समय अवंती पर सह-शासक के रूप में शासन किया था। वे कौरवों में ज्येष्ठ दुर्योधन के साथी थे। जबकि कृष्ण ने कुंती के पुत्रों और कौरवों के प्रतिद्वंद्वियों के पांडवो साथ गठबंधन किया था। इसलिये मित्रवृन्दा के भाई अपनी बहन के कृष्ण के साथ विवाह कराए जाने के विरोधी थे। सुबोधिनी टीका के अनुसार मित्र वृंदा और कृष्ण एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन उसके भाई और पिता दुर्योधन को उसका पति बनाना चाहते थे। उनके पिता ने उनके विवाह हेतु एक स्वयंवर का आयोजन किया था । इस प्रतियोगिता में दुर्योधन सहित सभी राजकुमार उपस्थित थे किंतु कृष्ण को आमंत्रित नहीं किया गया था । जब कृष्ण को इस बात का पता चला, तो वह स्वयंवर स्थल पर आये और मित्रवृंदा की इच्छा का सम्मान करते हुए, स्वयंवर स्थल से उनका हरण कर लिया। उन्हें मित्रवृन्दा के भाइयों, दुर्योधन और अन्य राजकुमारों द्वारा चुनौती दी गई। कृष्ण उन सभी को हरा कर मित्र वृंदा को द्वारका ले गए जहाँ उन्होंने उससे विधिवत विवाह किया।

श्रीकृष्ण- मित्रवृन्दा
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