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महाकाल लोक

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Mahakal Lok

महाकाल मन्दिर विकास परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है महाकाल मन्दिर आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाना । इसके लिए मन्दिर का समुचित विकास, दर्शनार्थियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का विस्तार तथा आगंतुकों के ज्ञानार्जन हेतु विभिन्न कार्य किये गए हैं। इसके साथ ही मन्दिर के भीतर स्थित कोटितीर्थ कुण्ड तथा बाहर स्थित रुद्रसागर तालाब को स्वच्छ कर, उनके आसपास वृक्षादि लगाए गए हैं। जिस महाकाल वन क्षेत्र में महाकाल मंदिर के पौराणिक काल के पहले से स्थित होने का उल्लेख प्राप्त होता है उसी वन के विवरणानुसार यहाँ लगाए जाने वाले वृक्षों का चुनाव किया गया है। परिसर के विकास कार्यों के अंतर्गत मन्दिर के आसपास स्थित दर्शनीय स्थलों से एकीकरण भी किया गया है जिसमें देवी हरसिद्धि शक्तिपीठ, मोक्षदायिनी क्षिप्रा के तट पर स्थित रामघाट तथा त्रिवेणी संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र मुख्य हैं। महाराज महाकाल के दर्शनाभिलाषी दक्षिण में- नन्दी द्वार, पश्चिम में पिनाकी द्वार, पूर्व में नीलकंठ द्वार तथा संगम सेतु से होते हुए मुख्य मंदिर तक पहुँच सकते हैं। महाकाल मार्ग पर मानसरोवर नाम से दर्शनार्थी सुविधा केंद्र उपलब्ध है। मन्दिर मार्ग में कलात्मक शिल्प, ई-वाहन पथ, पैदल पथ तथा 108 स्तम्भ हैं जिन पर नटराज शिव के 108 करण बनाए गए हैं। दर्शनार्थी अपने मोबाइल से क्यू आर कोड स्कैन कर शिल्पादि में उत्कीर्ण प्रसंगों के विषय में विस्तार से जान सकते हैं। हम आशा करते हैं कि प्रत्येक दर्शनार्थी का अनुभव अविस्मरणीय रहेगा । जय श्री महाकाल

महाकाल लोक
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