अर्धनारीश्वर
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · Ardhanarishwar, the Half-Woman Form
शिव पुराण के तृतीय अध्याय के अनुसार सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी हैं। सृष्टि को उत्पन्न करते हुए जब ब्रह्मा जी ने देखा कि जैसा वह चाहते हैं वैसी गति सृष्टिविकास की नहीं है, सृष्टि में कीट – पतंग, पशु-पक्षी, मनुष्य की संख्या में यथोचित वृद्धि नहीं है तो ब्रह्मा जी अत्यंत चिंतित हुए और भगवान विष्णु के पास पहुंचे । विष्णु जी ने ब्रह्माजी से कहा कि आप महादेव की आराधना करें, वही इस समस्या का समाधान बताएंगे। ब्रह्मा जी ने महादेव शिव की कठोर तपस्या शुरू की । तपस्या के उत्कर्ष पर आकाशवाणी हुई कि अब आप स्त्री-पुरुष द्वारा उत्पन्न ‘युगल सृष्टि’ की रचना करें । ब्रह्मा जी ने तब युगल सृष्टि की रचना करने का निश्चय किया । किंतु उस समय तक इस सृष्टि में किसी नारी की उत्पत्ति नहीं होने के कारण वे अपने निश्चय को पूरा करने में विफल रहे। ब्रह्मा जी ने शिवजी से पूछा कि युगल सृष्टि कैसी होगी तब शिवजी ने मुस्कुरा कर कहा - मैं आपका मनोरथ समझता हूँ । और ब्रह्माजी की सहायता के लिए शिवजी ने अपने आधे भाग से उमा देवी को पृथक किया और उन्हें कहा – देवी ! कृपा कर के ब्रह्मा जी का मनोरथ पूर्ण करने में सहयोग करें । ब्रह्मा जी ने भी परम शक्ति को प्रणाम करके कहा – देवी ! सृष्टि के प्रारंभ में आपके पतिदेव शंभू ने मेरी रचना की थी, उन्हीं के आदेश के अनुसार मैंने देवता आदि समस्त प्रजा की मानसिक रचना की। परंतु अनेक प्रयासों के बाद भी उनकी वृद्धि करने में असफल रहा हूं । अब युगल सृष्टि के समागम से प्रजा को उत्पन्न करने की इच्छा है किंतु नारी की उत्पत्ति करने में मैं समर्थ नहीं हूं । आप संपूर्ण सृष्टि तथा समस्त शक्तियों की उद्गम हैं, आप मुझे नारी कुल की रचना करने की शक्ति प्रदान करें। तथा मेरे पुत्र दक्ष की पुत्री के रूप में जन्म लेने की कृपा करें। ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर परमेश्वरी शिवा ने कहा – तथास्तु । और नारी कुल की सृष्टि हेतु अपनी भौंहों के मध्यभाग से अपने ही समान कांतिमय एक शक्ति प्रकट कर ब्रह्मा जी को प्रदान की। तभी से इस लोक में युगल सृष्टि की रचना प्रारंभ हो गई । इस प्रकार शिव और शक्ति एक दूसरे से अभिन्न तथा सृष्टि के आदि कारण हैं, जैसे पुष्प में गन्ध, चन्द्र में चंद्रिका ,सूर्य में प्रभा का स्वगुण सिद्ध है उसी प्रकार शिव में शक्ति भी सिद्ध है, शिव अजन्मा आत्मा है और शक्ति जगत् में व्यक्त सत्ता । यही अर्धनारीश्वर शिव का रहस्य है।

▶त्रिदेवलगभग 1 मिनट
▶महर्षि वशिष्ठ ने चंद्रभागा नदी के तट पर संध्या को तपस्या के लिए दीक्षित कियालगभग 7 मिनट
▶देवी सती के जन्म की कथालगभग 2 मिनट
▶राक्षस भस्मासुर के वध की कथालगभग 3 मिनट
▶शिव ने सती को आशीर्वाद दियालगभग 4 मिनट
▶नारद का भ्रमलगभग 6 मिनट
▶सुदर्शन चक्र प्रसंगलगभग 1 मिनट
▶नंदी की कहानीलगभग 2 मिनट
▶महाशिवरात्रि की कथालगभग 4 मिनट
▶देवी सती की कथालगभग 3 मिनट
▶शिव ने जटा से वीरभद्र को प्रकट कियालगभग 1 मिनट
▶दक्ष के उद्धार हेतु ब्रह्मा और ऋषिलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →