वेधशाला उज्जयिनी
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · The Vedh Shala of Ujjain
उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित वेधशाला का निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह के द्वारा सन् 1719 में कराया गया था। इसे जंतर मंतर भी कहा जाता है। महाराजा जयसिंह ने देश के पाँच नगरों में वेधशालाओं का निर्माण कराया था । इस समूह की सबसे पहली वेध शाला का निर्माण दिल्ली में कराया गया था। अन्य चार वैधशालाएं उज्जैन, जयपुर, मथुरा, तथा वाराणसी में स्थापित की गयी थी। उज्जैन में वेधशाला को खगोलीय गणनाओं जैसे सूर्य, ग्रहों व चंद्रमा की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था । खगोलशास्त्री तथा भूगोलवेत्ताओं के अनुसार देशांतर रेखा और कर्क रेखा उज्जैन में एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती है। जिससे यह क्षेत्र कालगणना की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनता है तथा यह स्थान पृथ्वी पर उत्तर नाभी केन्द्र के रूप में विख्यात है। राजा जय सिंह की खगोल विज्ञान में गहरी रुचि थी और उन्होंने खगोलगणना से संबंधित कई पुस्तकों का अध्ययन किया था। वर्ष १923 में इस वेधशाला का माधवराव सिंघिया द्वारा पुर्ननिर्माण कराया गया था। उज्जैन जंतर मंतर में जय सिंह लि द्वारा लगाए गए खगोलीय यंत्रों में नाडीवलय यंत्र, दिगंशयंत्र भितीयंत्र और शंकूयंत्र पारगमन यंत्र स्थापित हैं। इन उपकरणों की सहायता से प्रतिवर्ष भारतीय पंचाग प्रकाशित किया जाता है।

▶नवरत्न पैनल- 1लगभग 4 मिनट
▶सम्राट विक्रमादित्य पैनल - 2लगभग 3 मिनट
▶नवरत्न पैनल- 3लगभग 10 मिनट
▶सम्राट भारतलगभग 1 मिनट
▶राजा भोजलगभग 2 मिनट
▶कर्ण- सुदर्शन चक्रलगभग 3 मिनट
▶महाकाल लोकलगभग 2 मिनट
▶मंगल का पृथ्वी को सौंपा जानालगभग 1 मिनट
▶शिव-पार्वती विवाहलगभग 1 मिनट
▶अर्धनारीश्वरलगभग 3 मिनट
▶त्रिदेवलगभग 1 मिनट
▶महर्षि वशिष्ठ ने चंद्रभागा नदी के तट पर संध्या को तपस्या के लिए दीक्षित कियालगभग 7 मिनटपूरी यात्रा →