उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 632 · पड़ाव 139 / 141
सम्राट भारत
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Emperor Bharata
देवी मेनका की पुत्री शकुंतला व् महाराज दुष्यन्त के पुत्र भरत ने जब शासन का दायित्व संभाला तब उन्होंने यमुना, सरस्वती और गंगा जी के किनारे अश्वमेध और राजसूय यज्ञ किये, विश्वजित यज्ञ किया और वे शत्रुविजयी चक्रवर्ती सम्राट बने। उन्होंने न सिर्फ अपने साम्राज्य की सीमा को हिमालय से सागर तक विस्तार दिया बल्कि इस भूमि में गणतंत्र तथा प्रजातंत्र का प्रथम बीज रौंपा और जन्म से अधिक महत्व कर्म को देते हुए अपने पुत्रो के स्थान पर अन्य योग्य व्यक्ति को राज्य का अधीश बनाया। इसलिये उनके नाम पर भारतवर्ष के रूप में इस देश का नाम पड़ा।

सुनेंआवाज़
▶राजा भोजलगभग 2 मिनट
▶कर्ण- सुदर्शन चक्रलगभग 3 मिनट
▶महाकाल लोकलगभग 2 मिनट
▶मंगल का पृथ्वी को सौंपा जानालगभग 1 मिनट
▶शिव-पार्वती विवाहलगभग 1 मिनट
▶अर्धनारीश्वरलगभग 3 मिनट
▶त्रिदेवलगभग 1 मिनट
▶महर्षि वशिष्ठ ने चंद्रभागा नदी के तट पर संध्या को तपस्या के लिए दीक्षित कियालगभग 7 मिनट
▶देवी सती के जन्म की कथालगभग 2 मिनट
▶राक्षस भस्मासुर के वध की कथालगभग 3 मिनट
▶शिव ने सती को आशीर्वाद दियालगभग 4 मिनट
▶नारद का भ्रमलगभग 6 मिनटपूरी यात्रा →