उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 623 · पड़ाव 130 / 141

राणोजी सिन्धिया द्वारा महाकाल मन्दिर का पुनर्निर्माण

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Ranoji Scindia Rebuilds Mahakal Temple

ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर को मुस्लिम आक्रांता ने 1234 ईस्वी में आक्रमण कर दिया था। कालांतर में साम्राज्य विस्तार के लिए निकले ग्वालियर-मालवा के तत्कालीन सूबेदार राणोजी सिंधिया ने जब बंगाल विजय के रास्ते में उज्जैन में पड़ाव किया, तो महाकाल मंदिर की दुर्दशा देख उनका खून खौल उठा। उन्होंने अपने अधिकारियों और उज्जैन के कारोबारियों को आदेश दिया कि बंगाल विजय से लौटने तक महाकाल महाराज के लिए भव्य मंदिर बन जाना चाहिए। आक्रान्ताओं की इन कारगुजारियों का शमन करते हुए महाकालमंदिर का पुनर्निर्माण रणोजी सिंधिया के दीवान श्री रामचंद्रराव शेण्वी के मार्गदर्शन में 1732 ईस्वी में कराया गया। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने अपनी आत्मकथा 'राजपथ से लोकपथ पर' में लिखा है कि राणोजी जब वापस उज्जैन पहुंचे तो नवनिर्मित मंदिर में उन्होंने महाकाल की पूजा अर्चना की।

राणोजी सिन्धिया द्वारा महाकाल मन्दिर का पुनर्निर्माण
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