महर्षि अत्रि
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Maharishi Atri
महर्षि अत्रि वैदिक मंत्रद्रष्टा ऋषि हैं। इनकी गणना सप्तऋषियों में की जाती हैं। उज्जैन में इनके द्वारा तपस्या किए जाने का उल्लेख प्राप्त होता है। ऋग्वेद के पंचम मण्डल का संकलन इनके द्वारा किया गया हैं । यह मण्डल 'आत्रेय मण्डल' कहलाता है। इस मण्डल में 87 सूक्त हैं जिनमें महर्षि अत्रि द्वारा विशेष रूप से अग्नि, इन्द्र, मरूत, विश्वेदेव तथा सविता आदि देवों की वन्दना की गई है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र हैं, जो उनके नेत्रों से उत्पन्न हुए थे। इन्होंने ऋषि कदम की पुत्री देवी अनुसूया से विवाह किया था । माता अनूसुया के सतीत्व तथा महर्षि अत्रि के तपोबल के कारण त्रिदेवों के अंश रूप में दत्तात्रेय (विष्णु), दुर्वासा (शिव) औरर सोम (ब्रह्मा) उत्पन्न हुए थे मन्त्रकार के रूप में इन्होंने उत्तानपाद को अपने पुत्र के रूप में ग्रहण किया था। इनके ब्रह्मवादिनी नाम की कन्या थी । सोम के राजसूय यज्ञ में उन्होंने पुरोहित का कार्य किया था त्रिपुरासुर के विनाश के लिए इन्होंने शिव की आराधना की थी । वनवास के समय श्रीराम ऋषि अत्रि के आश्रम भी गये थे । वेदों में यह स्पष्ट रूप से वर्णित है कि महर्षि अत्रि को अश्विनीकुमारों की कृपा प्राप्त थी । एक बार जब वे समाधिस्थ थे, तब दैत्यों ने उन्हें उठाकर शतद्वार यन्त्र में डाल दिया और भाग लगाकर इन्हें जलाने का प्रयत्न किया, उरा समय अश्विनीकुमारों ने वहाँ पहुँचकर इन्हें बचाया। ऋग्वेद के प्रथम मण्डल में यह कथा आयी है। ऋग्वेद के दशम मण्डल में महर्षि अत्रि की दीर्घ तपस्या के अनुष्ठान का वर्णन आया है औरर बताया गया है कि यज्ञ तथा तप आदि करते-करते जब महर्षि अत्रि वृद्ध हो गये थे, तब अश्विनीकुमारों ने इन्हें नवयौवन प्रदान किया । इस प्रकार महर्षि अत्रि ने अपने द्वारा हृष् मन्त्रों में, धर्मसूत्रों में तथा अपने सदाचरण से यह बताया है कि व्यक्ति को सत्कर्म का ही अनुष्ठान करना चाहिये।

▶श्रीरामपितृतर्पणलगभग 1 मिनट
▶श्री राम महाकाल दर्शनलगभग 1 मिनट
▶सान्दिपनी आश्रमलगभग 1 मिनट
▶आदि शंकराचार्य भट्ट भास्कर शास्त्रार्थ उज्जैनलगभग 1 मिनट
▶गुरू नानक देव जी महाराज का उज्जैन आगमनलगभग 1 मिनट
▶राजा इन्द्रद्युम्नलगभग 1 मिनट
▶नवनाथलगभग 1 मिनट
▶सम्राट विक्रमादित्य द्वारा अयोध्या मंदिर का निर्माणलगभग 1 मिनट
▶राणोजी सिन्धिया द्वारा महाकाल मन्दिर का पुनर्निर्माणलगभग 1 मिनट
▶देवी अहिल्याबाई होल्करलगभग 1 मिनट
▶श्रीकृष्ण- मित्रवृन्दालगभग 2 मिनट
▶उदयन वासवदत्तालगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →