सान्दिपनी आश्रम
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Sandipani Ashram
प्राचीन काल में उज्जैन पौराणिक, राजनैतिक तथा वाणिज्यिक के साथ शिक्षा के क्षेत्र मैं भी प्रतिष्ठित केन्द्र था । भगवान श्री कृष्ण एवं उनके अग्रज श्री बलराम ने यहीं ऋषि सान्दिपनी के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी । यहीं सुदामा से उनकी मित्रता हुई । इस आश्रम मैं ग्रहण की गई शिक्षा के अन्तर्गत उन्होंने चौदह प्रकार की विद्या तथा चौसठ प्रकार की कलाएँ प्राप्त की । ऋषि सान्दिपनी आश्रम का यह सन्दर्भ चौसठ कलाओं की सूची सहित श्रीमद भागवत के दशम स्कंद मैं मिलता है । आश्रम के पास के क्षेत्र को अंकपात के नाम से जाना जाता है, एसी मान्यता है कि यह स्थान भगवान कृष्ण द्वारा अपनी लेखनी को धोने के लिए प्रयोग किया जाता था। हु वर्तमान में महर्षि सांदीपनि आश्रम मंगलनाथ रोड पर स्थित है। यहीं एक कुण्ड भी है जिसका उल्लेख गोमती कुण्ड के नाम से श्रीमद भागवत में प्राप्त होता है । वल्लभ संप्रदाय के वल्लभाचार्य जी की चौरासी बैठकों में से तिहत्तरवीं बैठक भी इस स्थान पर है । इस प्रकार उज्जैन शैव,शाक्त तथा वैष्णव सम्प्रदायों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है ।

▶आदि शंकराचार्य भट्ट भास्कर शास्त्रार्थ उज्जैनलगभग 1 मिनट
▶गुरू नानक देव जी महाराज का उज्जैन आगमनलगभग 1 मिनट
▶राजा इन्द्रद्युम्नलगभग 1 मिनट
▶नवनाथलगभग 1 मिनट
▶सम्राट विक्रमादित्य द्वारा अयोध्या मंदिर का निर्माणलगभग 1 मिनट
▶राणोजी सिन्धिया द्वारा महाकाल मन्दिर का पुनर्निर्माणलगभग 1 मिनट
▶देवी अहिल्याबाई होल्करलगभग 1 मिनट
▶श्रीकृष्ण- मित्रवृन्दालगभग 2 मिनट
▶उदयन वासवदत्तालगभग 1 मिनट
▶सम्राट अशोकलगभग 1 मिनट
▶वेधशाला उज्जयिनीलगभग 2 मिनट
▶नवरत्न पैनल- 1लगभग 4 मिनटपूरी यात्रा →