उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 617 · पड़ाव 124 / 141

सान्दिपनी आश्रम

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Sandipani Ashram

प्राचीन काल में उज्जैन पौराणिक, राजनैतिक तथा वाणिज्यिक के साथ शिक्षा के क्षेत्र मैं भी प्रतिष्ठित केन्द्र था । भगवान श्री कृष्ण एवं उनके अग्रज श्री बलराम ने यहीं ऋषि सान्दिपनी के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी । यहीं सुदामा से उनकी मित्रता हुई । इस आश्रम मैं ग्रहण की गई शिक्षा के अन्तर्गत उन्होंने चौदह प्रकार की विद्या तथा चौसठ प्रकार की कलाएँ प्राप्त की । ऋषि सान्दिपनी आश्रम का यह सन्दर्भ चौसठ कलाओं की सूची सहित श्रीमद भागवत के दशम स्कंद मैं मिलता है । आश्रम के पास के क्षेत्र को अंकपात के नाम से जाना जाता है, एसी मान्यता है कि यह स्थान भगवान कृष्ण द्वारा अपनी लेखनी को धोने के लिए प्रयोग किया जाता था। हु वर्तमान में महर्षि सांदीपनि आश्रम मंगलनाथ रोड पर स्थित है। यहीं एक कुण्ड भी है जिसका उल्लेख गोमती कुण्ड के नाम से श्रीमद भागवत में प्राप्त होता है । वल्लभ संप्रदाय के वल्लभाचार्य जी की चौरासी बैठकों में से तिहत्तरवीं बैठक भी इस स्थान पर है । इस प्रकार उज्जैन शैव,शाक्त तथा वैष्णव सम्प्रदायों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है ।

सान्दिपनी आश्रम
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