उज्जैन इतिहास ›पट्टिका 615 · पड़ाव 122 / 141
श्रीरामपितृतर्पण
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Shri Ram's Pitra Tarpan
प्राचीन आख्यानों के अनुसार श्रीराम का उज्जैन से गहन सम्बन्ध रहा है। आख्यानों के अनुसार श्रीराम, लक्ष्मण तथा माता सीता अपने वनवासकाल में उज्जैन आये थे। इनके द्वारा यहां पर पतित पावनी क्षिप्रा में अपने पितों का शास्त्रीय विधान से तर्पण किया गया था। तर्पण के साथ-साथ यहां पर इनके द्वारा अपने दिंवगत पिता राजा दशरथ का श्राद्ध भी किया गया था। यह स्थल वर्तमान में रामघाट के नाम से जाना जाता है । रामघाट पर ही सिंहस्थ का मुख्य स्नान होता है जिसमें साधु-सन्तों के साथ-साथ कोटि जन रनान कर अपने को धन्य मानते हैं ।

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▶श्री राम महाकाल दर्शनलगभग 1 मिनट
▶सान्दिपनी आश्रमलगभग 1 मिनट
▶आदि शंकराचार्य भट्ट भास्कर शास्त्रार्थ उज्जैनलगभग 1 मिनट
▶गुरू नानक देव जी महाराज का उज्जैन आगमनलगभग 1 मिनट
▶राजा इन्द्रद्युम्नलगभग 1 मिनट
▶नवनाथलगभग 1 मिनट
▶सम्राट विक्रमादित्य द्वारा अयोध्या मंदिर का निर्माणलगभग 1 मिनट
▶राणोजी सिन्धिया द्वारा महाकाल मन्दिर का पुनर्निर्माणलगभग 1 मिनट
▶देवी अहिल्याबाई होल्करलगभग 1 मिनट
▶श्रीकृष्ण- मित्रवृन्दालगभग 2 मिनट
▶उदयन वासवदत्तालगभग 1 मिनट
▶सम्राट अशोकलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →