मंदिर व स्थान ›पट्टिका 612 · पड़ाव 119 / 141

गढ़कालिका

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Garhkalika Temple

सनातन संस्कृति की मुख्य धराए शिव भक्त तथा वैष्णव परम्पराओ से निर्मित है। इन सभी परम्पराओ में उज्जैन विशेष महत्व रखता है। शक्ति उपासको के लिए उज्जैन स्थित महत्वपूर्ण मंदिरो में देवी गढ़कालिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। कुछ ग्रथों में इसे शक्तिपीठ भी कहा गया है । आदि शंकर के शक्तिपीठ स्तोत्र में इन्हें 48 शक्तिपीठों की सूची में शामिल किया गया है। इस मंदिर के गर्भग्रह में तीन विग्रह प्रतिष्ठित है, जिनमे कालिका मध्य में तथा उनके दोनों तरफ लक्ष्मी तथा सरस्वती विराजित है मंदिर मंडप में लगे चित्र इस स्थान के तंत्र साधना से भी जुड़े होने का संकेत देते है। कविकुलगुरु कालिदास के लिए कहा जाता है की उनकी वितक्षणता देवी गढ़कालिका द्वारा ही प्रदत्त थी। कालिदास के संबंध में मान्यता है कि जब से वे इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने लगे तभी से उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का निर्माण होने लगा तथा उन्हें काव्य करने की शक्ति प्राप्त हुई। कालिदास रचित श्यामला दंडकम्‌ महाकाली स्तोत्र एक अत्यन्त सुंदर रचना है। मंदिर परिसर में दो द्वीप स्तम्भ स्थापित है जो नवरात्री और अन्य त्योहारों में प्रज्वलित किये जाते है । नवरात्र में यहाँ मेला लगता है जिसमे सैकड़ों श्रद्धालु देवी के दर्शनार्थ आते है ।

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