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हरसिद्धि शक्तिपीठ

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · Harsiddhi Shaktipeeth

पुराणों के अनुसार, सती के शव के विभिन्न अंगों से 52 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था। इसके पीछे यह कथा है कि दक्ष प्रजापति ने कनखल हरिद्वार में बृहस्पति सर्व नामक यज्ञ का आयोजन किया गया था । उस यज्ञ में प्रजापति ने ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवीदेवताओं को आमंत्रित किया गया । लेकिन जानबूझकर अपने जामाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया। शंकरजी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर भी यज्ञ में पहुँच गईं। यज्ञ स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और उग्र विरोध प्रकट किया। इस पर दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर के लिए अपशब्द कहे। इस अपमान से पीड़ित हुई सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी। भगवान शंकर को जब इस घटना का पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया। भगवान शंकर के आदेश पर उनके गणों के कोप से भयभीत सारे देवता व ऋषिगण यज्ञस्थल से भाग गये। भगवान शंकर सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठा कर दुःखी मन से इधर उधर घूमने लगे। तदनंतर सम्पूर्ण विश्व को प्रतय से बचाने के लिए जगत के पालनकर्त्ता भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के पार्थिव शरीर को खण्डित कर दिया । तब सती के शरीर के अंग जिन स्थानों पर गिरे वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।ऐसा ही एक पावन शक्तिपीठ उज्जैन में 'हरसिद्धि माता' के नाम से स्थित है। मांन्यता है कि यहाँ देवी की दाहिनी कोहनी गिरी थी। प्राचीन अनुश्रुति के अनुसार सम्राट विक्रमादित्य देवी के अनन्य भक्त थे, माता हरसिद्धि इनकी कुलदेवी थी। वे हर बारहवें वर्ष देवी के मंदिर आकर अपना शीश माता के चरणों में अर्पित करते थें। लेकिन माता हरसिद्धि देवी की कृपा से उन्हें नया सिर मिल जाता था। किन्तु जब बारहवीं बार उन्होंने अपना सिर चढ़ाया तो वो. फिर वापस नहीं आया और उनका जीवन समाप्त हो गया। मान्यता है कि मंदिर परिसर में रखे 11 सिंदूर लगे मुण्ड राजा विक्रमादित्य के ही हैं । हरसिद्धि माता मन्दिर एक परकोटे से घिरा हुआ है, जिसमें चार प्रवेश द्वार हैं. मंदिर के पूर्व द्वार पर रुद्रसागर है और दक्षिण-पूर्व कोने में कुछ ही दूरी पर एक बावड़ी है, जिसमें एक स्तंभ है । माता के पावन धाम में दो दीप स्तंभ है। प्रत्येक स्तम्भ पर 1100 दीप हैं, जिन्हें रोज शाम को प्रज्वलित किया जाता है। इस दृश्य को देखने के लिए दूर दूर से लोग यहां पर पहुंचते हैं ।

हरसिद्धि शक्तिपीठ
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