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कपालमोचक शिव

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Kapalmochak Shiva

सनातन संबंधी मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा हैं । वर्तमान में हम ब्रह्मा जी के चार मस्तक देखते हैं किंतु आरंभ में उनके पांच सिर थे । उनका पांचवा सिर उर्ध्वमुखी था जिसे भगवान शिव ने क्रोध में काट दिया था । इस प्रसंग की विस्तृत कथा कुछ यूं है - सृष्टि सर्जना के समय ब्रह्मा जी ने एक अत्यंत मोहक रूप वाली स्त्री रची । उसका सौन्दर्य अनुपम था । ब्रह्मा जी अपनी ही रचना पर मोहित हो गए और आसक्ति के भाव से उसे देखने लगे । कामदेव को भस्मीभूत करने वाले कामजीत महादेव शिव ने जब ब्रह्मा के इस भाव को जाना तो उन्हें अत्यधिक क्रोध आया । उनकी दृष्टि में वो सुंदर स्त्री ब्रह्मा की पुत्री के समान थी अतः ब्रह्मा को उनके प्रति पितृवत व्यवहार करना चाहिए था । क्रोध में शिव जी ने ब्रह्मा का ऊर्ध्वमुख काट दिया । इसके अतिरिक्त ब्रह्मा जी को उन्होंने दंड स्वरूप शाप भी दिया कि उनकी पूजा उपासना नहीं होगी । इसीलिए आज भी भगवान शिव तथा श्री विष्णु की पूजा होती है किंतु ब्रह्मा की पूजा का विधान देखने को नहीं मिलता है । देश में ब्रह्मा के मंदिर भी बहुत कम है । किंतु ब्रह्मा जी का सिर काटने के कारण शिव जी को ब्रह्महत्या लगी जिसके मोचन हेतु वे विभिन्न तीर्थों पर गए । अंततः जिस तीर्थ पर उन्हें ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली उसे कपालमोचन तीर्थ कहा जाता है । इस कथा का उद्देश्य भी अन्य पौराणिक कथाओं की तरह धार्मिक एवं नैतिक सिद्धांतों का संदेश देना है। ब्रह्मा जी ने पुत्रिवत स्त्री पर कुदृष्टि डाल कर जो अनैतिक उदाहरण प्रस्तुत किया था उसी के कारण उनका सिर कटा तथा शाप मिला ।

कपालमोचक शिव
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