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नटराज रंगमंच

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Natraj Rangmanch, the Open Theatre

शिव के नर्तक रूप की स्तुति नटराज नाम से की जाती है। नटराज ही स्वर, शब्द तथा कला सहित समस्त सृष्टि का ऊर्जा स्रोत हैं, जो सृजन तथा संहार दोनों ही में सक्षम हैं । है। अपने परिवार के साथ 'सन्ध्या नृत्य' करते शिव के मोहक चित्र भी पारंपरिक चित्र शैलियों में देखे जा सकते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक भी नटराज के नृत्य को ऊर्जा स्त्रोत मानते हैं, स्विट्जरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु विज्ञान प्रयोगशाला में नटराज शिव की मूर्ति स्थापित की गई इन्हीं पक्षों को ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर परिसर में निर्मित मुक्ताकाश नाट्यशाला का नाम 'नटराज रंगशाला' रखा गया है। इसमें 500 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है । मंच की पार्श्वभूमि में रुद्रसागर इस स्थान की सुरम्यता व शोभा गुणित करता है। दर्शकगण यहाँ से श्री महाकालेश्वर मन्दिर के शिखर के दर्शन भी कर सकते हैं। महादेव शिव के अनेक रूप हैं, वे मृत्युन्जय भी है और आशुतोष भी, दक्षिणामूर्ति भी है और आदियोगी भी, नीलकंठ भी है और रुद्र भी। ऐसा ही एक रूप है नृत्य करते शिव का, जिन्हें हम नटराज के नाम से जानते हैं। शिव प्रसन्न होने पर भी नृत्य करते हैं और रौद्र अवस्था में भी, वे अपनी प्रिया और परिवार के लिए भी नृत्य करते हैं। शिव नटराज रूप में स्वर, शब्द तथा कला के देव हैं, उनका नृत्य सृजन तथा संहार दोनों ही का हेतु है। अज्ञान के अन्धकार को समाप्त करने वाले, उर्जा व आनंद के स्रोत नटराज का वही स्वरुप आपके समक्ष है ।

नटराज रंगमंच
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