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शाही स्नान

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Shahi Snan, the Royal Bath

कुंभ मेले की शुरुआत शाही स्नान से होती है। शाही स्नान को राजयोगी स्नान भी कहा जाता है.कुंभ का यह सबसे बड़ा आकर्षण होता है जिसमें अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, महंत और नागा साधु संत शाही स्नान करते हैं और इस दुर्लभ स्नान को अमृत स्नान मानते हैं। पहला शाही स्नान शिवरात्रि के दिन, दूसरा शाही स्नान सोमवती अमावस्या और तीसरा मुख्य शाही स्नान मेष संक्रांति के अवसर पर और चौथा शाही स्नान बैसाख पूर्णिमा पर होता है। सनान से पहले कुछ विधि विधान का पालन किया जाता है। कुंभ मेले के दौरान अखाड़ों के शाही स्नान का वक्त तय कर दिया गया है। उनसे पहले कोई भी स्नान के लिए नदी में नहीं उतर सकता है। शास्त्रों और पुराणों में शाही स्नान को लेकर निकाली जाने वाली पेशवाई का कोई उल्लेख नहीं है लेकिन यह परंपरा सदियों पुरानी है। मराठा काल में शाही स्नान की परम्परा को अधिक व्यवस्था रूप से स्योजित किया जाने लगा। कहते हैं कि आज भी उसी क्रम व विधान से शाही स्नान किया जाता है।

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