सिंहस्थ
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Simhastha
सिंहस्थ उज्जैन का महान स्नान पर्व है। बारह वर्षों के अंतराल से यह पर्व तब मनाया जाता है जब बृहस्पति सिंह राशि पर स्थित रहता है। पवित्र क्षिप्रा नदी में पुण्य स्नान की विधियां चैत्र मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होती हैं और पूरे मास में वैशाख पूर्णिमा के अंतिम स्नान तक भिन्न-भिन्न तिथियों में सम्पन्न होती है। उज्जैन के महापर्व के लिए पारम्परिक रूप से दस योग महत्वपूर्ण माने गए हैं। सिंह राशि में गुरु (बृहस्पति ) मेष राशि का सूर्य तुला का चन्द्रमा वैशाख मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि कुशस्थली- उज्जयिनी तीर्थ स्वाति नक्षत्र व्यतिपात योग और सोमवार समुद्र मंथन के बाद अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग में बारह दिन तक देवताओं और दानवों के बीच संघर्ष चलता रहा और उस कुंभ से चार स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गईं। यह स्थान पृथ्वी पर हरिद्वार,प्रयाग, उज्जैन और नासिक थे। इन स्थानों की पवित्र नदियों को अमृत की बूंदे प्राप्त करने का श्रेय मिला। क्षिप्रा के पावन जल में अमृत-सम्पात की स्मृति में सिंहस्थ महापर्व उज्जैन में मनाया जाता है।

▶शाही स्नानलगभग 1 मिनट
▶महाकाल शाही सवारीलगभग 1 मिनट
▶चिंतामण गणेशलगभग 2 मिनट
▶अंगारेश्वर महादेवलगभग 2 मिनट
▶नागचंद्रेश्वरलगभग 2 मिनट
▶नारायण धामलगभग 1 मिनट
▶हरिहर मिलनलगभग 1 मिनट
▶हरसिद्धि शक्तिपीठलगभग 3 मिनट
▶गढ़कालिकालगभग 2 मिनट
▶काल भैरवलगभग 2 मिनट
▶महर्षि अत्रिलगभग 2 मिनट
▶श्रीरामपितृतर्पणलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →