शिव अवतार ›पट्टिका 476 · पड़ाव 105 / 141

आदियोगी शिव (मुद्रा 2)

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Adiyogi Shiva, Second Posture

आप जिस प्रभावशाली मूर्ति के समक्ष खड़े हैं वो आदियोगी शिव की है । आदियोगी भगवान शिव को इस प्रतिमा में आप सर्प पर आसीन देख रहे हैं । सर्प योगशास्त्र के अनुसार प्राणी की कुण्डलीनी शक्ति का प्रतीक है । वर्ष 2015 से विश्व योग दिवस के रूप में योग का वैश्वीकरण हुआ और आज योग समस्त विश्व के लिए भारत की अनुपम देन के रूप में विख्यात है । किन्तु सनातनधर्मावलम्बियों के लिए योग स्वयं भगवान शिव का आशीर्वाद है । हमारी परम्परा में योग भगवान शिव के आदियोगी स्वरुप की देन है । योग दक्षिणामूर्ति उनका एक अन्य रूप है जो उपासक को योग में प्रवृत्त तथा शिक्षित करता है । सर्वप्रथम सप्तऋषियों व देवी पार्वती ने साक्षात शिव से योग का ज्ञान प्राप्त किया था व कालांतर में इसका प्रसार समस्त संसार में हुआ । शिव को योग का आदिगुरु मानने वाला एक प्रमुख पंथ नाथपंथ भी है । योग मात्र आसन या व्यायाम नहीं बल्कि आत्म साक्षात्कार कराने में सक्षम एक उन्नत विध्या है । योग से जीव और परमात्मा के ऐक्य की अनुभूति कर लेने वाला व्यक्ति योगी कहलाता है । तन व मन के स्वास्थ्य का योग एक अत्यंत सशक्त माध्यम है ।

आदियोगी शिव (मुद्रा 2)
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