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गजासुर संहार

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Gajasur Samhar

‘गजासुरसंहारमूर्ति’ में भगवान शिव द्वारा गज रूपी असुर गजासुर का संहार दर्शाया गया है। इसमें शिव रौद्र रूप में उस गज-असुर के सिर पर प्रचंड नृत्य करते दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि गजासुर महिषासुर का पुत्र था, वही भैंसे के रूप वाला असुर जिसका वध देवी दुर्गा ने किया था। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उसने कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया कि उसका वध केवल कोई जितेन्द्रिय ही कर सकेगा, अर्थात वह जिसने सभी इच्छाओं और वासनाओं को जीत लिया हो। स्वयं को अजेय समझकर वह असुर देवताओं और धर्मपरायण लोगों को सताने लगा। वह वाराणसी पहुँचा और ऋषियों पर आक्रमण कर दिया, तब ऋषियों ने भगवान शिव को सहायता के लिए पुकारा। उनकी पुकार से द्रवित होकर शिव ने गजासुर का संहार किया। मृत्यु से पहले गजासुर ने भगवान शिव की स्तुति की। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उससे वर माँगने को कहा। गजासुर ने प्रार्थना की कि प्रभु उसकी खाल को धारण करें, जिसे शिव ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया।

गजासुर संहार
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