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दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Dattatreya Avatar, Posture 3

ऋषि अत्रि और देवी अनुसूया की पुत्र दत्तात्रेय को त्रिवेदों का अंश माना जाता है। इसीलिए दत्तात्रेय का स्वरुप तीन मुख तथा छह हाथ वाला है। इनके साथ सदैव एक गाय, चार कुत्ते और एक औदुंबर वृक्ष दिखाये जाते हैं। मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। शैव, वैष्णव और शाक्त ही नहीं बल्कि नाथ, दशनामी और इनसे सम्बंधित उपसंप्रदाय भी दत्तात्रेय को गुरु के रूप में स्थान देते हैं। भगवान् दत्तात्रेय के शिष्यों में भगवन परशुराम का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। हालांकि स्वयं भगवान् दत्तात्रेय के 24 गुरु रहे है । दत्तात्रेय ने जिस से कोई भी गुण प्राप्त किया उसे अपना गुरु माना। इस प्रकार पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चद्र्मा, सूर्य, कपोत, अजगर, सिंधु, पतंग, भ्रमर , मधुमक्खी, गज, मीन, पिंगला, कुकर पक्षी, बालक, कुमारी, सर्प, शरकृत, मकड़ी, और भृंगी उनके गुरु हुए।

दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)
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