माँ काली
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · Maa Kali
देवी पारवती तथा महादेव के जोड़े को ब्रह्माण्डीय जोड़ा कहा जाता है । वैवाहिक, आदर्श आपसी समाज व सम्मान से सम्बंधित इनकी अनेक कथाएँ प्राप्त होती है । शिव पारवती के साहचर्य की विशेषता ये भी है की ये दोनों ही एक दूसरे को सम्मान व श्रेष्ठता की दृष्टि से देखते है। इसलिये इनकी कथाओ में रोचकता होती है । एक बार की कथा है इनकी नृत्य प्रतियोगिता की देवी महामाया (महाकाली) ब्रह्माजी की स्तुति करने पर प्रकट हुई। कमलजन्मा ब्रह्माजी द्वारा स्तवित महाकाली अपने दस हाथों में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डि, मुंड और शंख धारण किए हुए है। त्रिनेत्रा भगवती के समस्त अंग दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं। इस विश्व-ब्रह्माण्ड को धारण करती हैं। उनसे ही इस जगत् की सृष्टि होती है। उन्हीं से इसका पालन होता है और वे ही सदा कल्प के अन्त में सबको अपना ग्रास बना लेती हैं । इस जगत् की उत्पत्ति के समय वे सृष्टिरुपा हैं, पालन-काल में स्थितिरूपा हैं तथा कल्पान्त के समय संहाररूप धारण करनेवाली हैं। उन्हीं की प्रेरणा से विष्णु जी ने मधु और कैटभ जैसे असुरों को मार गिराया था। शिव पुराण के अनुसार उनके काली रूप में अवतार, मधु और कैटभ दो असुरों का अन्त करने के लिये हुआ था प्रलयकाल में सम्पूर्ण जगत के जलमग्न होने पर भगवान विष्णु योग निद्रा में शेष शय्यापर शयन कर रहे थे। उन्हीं दिनों भगवान विष्णु के कानों के मैल से दो असुर मधु-कैटभ उत्पन्न हुए । ब्रह्माजी (जो विष्णुजी की नाभि से उत्पन्न कमल पर विराजमान थे) ने महामाया परमेश्वरी स्तुति की और उनसे प्रार्थना की, अम्बिके! तुम इन दोनों असुरों को मोहित करके मेरी रक्षा करो और अजन्मा भगवान् नारायण को जगा दो' । ब्रह्माजी की प्रार्थना पर सम्पूर्ण विद्याओं की अधिदेवी जगज्जननी महाविद्या काली फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को त्रैलोक्य - मोहिनी शक्ति प्रकट हुई और अन्ततः भगवती महाकाली की कृपा से उन दैत्यों की बुद्धि भ्रमित हो जाने से उनका अन्त हुआ। भ्रमित होकर उन दैत्यों ने भगवान विष्णु जी को वर स्वरूप कहा कि 'तुम हमको ऐसी जगह मार सकते हो, जहाँ जल से भीगी हुई धरती न हो'- उस वक्त सारी पृथ्वी एकार्णव जल में डूबी हुई थी। बहुत अच्छा कहकर भगवान विष्णु ने अपनी जाँघ पर उनके मस्तकों को अपने परम तेजस्वी चक्र से काट डाला। दस महाविद्याओं में काली प्रथम हैं। महाभागवत के अनुसार 'महाकाली' ही मुख्य हैं और उन्हीं के उग्र और सौम्य दो रूपों में अनेक रूप धारण करनेवाली दस महाविद्याएँ हैं। दार्शनिक दृष्टिसे कालतत्त्वकी प्रधानता सर्वोपरि है। इसलिए महाकाली या काली ही समस्त विद्याओं की आदि हैं।

▶मणिभद्रलगभग 1 मिनट
▶पंचमुखी हनुमानजी (आसन 2)लगभग 2 मिनट
▶शरभ अवतारलगभग 2 मिनट
▶भगवान अयप्पा: शिव और मोहिनी के पुत्रलगभग 4 मिनट
▶दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)लगभग 1 मिनट
▶गंगा अवतरणलगभग 1 मिनट
▶गजासुर संहारलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री क्रोध भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री भीषण भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री चण्ड भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री असितांग भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री कपाल भैरवलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →