शिव कथाएँ ›पट्टिका 450 · पड़ाव 86 / 141
मणिभद्र
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Manibhadra
मणिभद्र शिव जी के एक प्रसिद्ध गण हैं। जब दक्ष ने प्रजापति के रूप में यज्ञ किया तब उन्होंने अपने दामाद देवाधिदेव शिव को आमंत्रित नहीं किया और अपनी पुत्री सती के सामने उनके पति शिव की घोर निंदा की। वहाँ उपस्थित महर्षि भृगु भी महादेव की निंदा करने लगे। इस सबके बीच पिता दक्ष प्रजापति के द्वारा भरी सभा में अपने पति के अपमान से क्षुब्ध सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर लिया। इस समाचार को पाकर क्रुद्ध हुए शिवजी ने प्रमथगणों सहित वीरभद्र और महाकाली को दक्ष यज्ञ विध्वंस के लिए भेजा। वीरभद्र के साथ गण मणिभद्र भी थे। शिवपुराण के अनुसार प्रतापी मणिभद्र ने महर्षि भृगु को उठाकर पटक दिया और उनकी छाती को पैर से दबाकर उनकी दाढ़ी- मूँछ नोच ली। यह उनके द्वारा महादेव शिव का अपमान किए जाने का दंड था ।

सुनेंआवाज़
▶पंचमुखी हनुमानजी (आसन 2)लगभग 2 मिनट
▶शरभ अवतारलगभग 2 मिनट
▶भगवान अयप्पा: शिव और मोहिनी के पुत्रलगभग 4 मिनट
▶दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)लगभग 1 मिनट
▶गंगा अवतरणलगभग 1 मिनट
▶गजासुर संहारलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री क्रोध भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री भीषण भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री चण्ड भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री असितांग भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री कपाल भैरवलगभग 1 मिनट
▶शिव का हनुमान अवतारलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →