भगवान शिव महेश्वर के रूप में
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Lord Shiva as Maheshwara
आप 'महेश्वरमूर्ति' के सम्मुख हैं। भगवान शिव की महेश्वर मूर्ति का वर्णन कामिकागम, सन्तानसंहिता, शिवपुराण, वातुलागम, लिंगपुराण आदि ग्रन्थों में प्राप्त होता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान शिव संसार पर अनुग्रह करने की कामना से महेश्वर स्वरूप को धारण करते है। महाकाललोक में निर्मित यह प्रतिमा अत्यन्त ही भव्य तथा शिल्पशास्त्र के लक्षणों के अनुसार निर्मित की गई है। आख्यानों के अनुसार एक समय तारकाक्ष नामक दैत्य द्वारा सम्पूर्ण विश्व में आतंक मचाया गया। उसने इन्द्र को पदच्युत कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। इन्द्रादि देवतागण भगवान शिव की शरण में जाकर उनकी वन्दना करते है। नाना प्रकार से अपनी अवस्था का वर्णन देवगण शिव के सम्मुख करते है। देवताओं को कष्ट को सुनकर भगवान शिव द्रवित हो जाते है। तारकाक्ष को मारने के लिए शिव महेश्वर स्वरूप को धारण करते है। भगवान शिव ने इस स्वरूप को धारण कर तारकाक्ष से युद्ध किया तथा उसका पराभव कर दैत्य का वध किया था। इस पर देवताओं ने इनकी स्तुति की जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वरदान दिया कि जो कोई भक्त मेरे महेश्वररूप का पूजन करेंगे उनके समस्त दुखों तथा बाधाओं का नाश होगा। महेश्वरमूर्ति परमेश्वर की करूणा तथा अनुग्रह का प्रतीक है। यह मूर्ति इस ओर संकेत करती है कि जब भी भक्तों को कोई कष्ट अथवा संकट आता है तो ईश्वर किसी न किसी प्रकार उसकी सहायता करते है।

▶माँ कालीलगभग 3 मिनट
▶मणिभद्रलगभग 1 मिनट
▶पंचमुखी हनुमानजी (आसन 2)लगभग 2 मिनट
▶शरभ अवतारलगभग 2 मिनट
▶भगवान अयप्पा: शिव और मोहिनी के पुत्रलगभग 4 मिनट
▶दत्तात्रेय अवतार (मुद्रा 3)लगभग 1 मिनट
▶गंगा अवतरणलगभग 1 मिनट
▶गजासुर संहारलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री क्रोध भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री भीषण भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री चण्ड भैरवलगभग 1 मिनट▶अष्ट भैरव: श्री असितांग भैरवलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →