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खड़ी हुई देवी लक्ष्मी

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Standing Goddess Lakshmi

माता महालक्ष्मी वैभव, समृद्धि, धन-धान्य, सुख, सौभाग्य, वाहन, उन्नती आदि की अधिष्ठात्री देवी है। इनका सर्वप्रथम वर्णन ऋग्वेद के खिलभाग में संकलित 'श्रीसुक्त' में प्राप्त होता है जो इस ओर संकेत करता है कि अत्यन्त प्राचीनकाल से भारतभूमि पर लक्ष्मी की उपासना प्रचलित थी। अथर्ववेद के 'शतलक्ष्मीसूक्त' में भी महालक्ष्मी की सौ प्रकार की विभुतियों का वर्णन प्राप्त होता है। भारतीय परम्परा मे लक्ष्मी के कई स्वरूपों का वर्णन प्राप्त होता है, मुख्यतः इनके अष्ट लक्ष्मी स्वरूप जनसामान्य में विशेषरूप से प्रचलित है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार श्री हरि विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का जन्म समुद्रमन्थन की घटना के समय समुद्र से हुआ था, इसलिए इन्हें समुद्र की पुत्री भी कहा जाता है। देवी द्वारा सन्तानसुख की प्राप्ति के लिए कर्दम, आनन्द, चिक्लित तथा इन्दिरासुत इन चार ऋषियों को अपना मानसपुत्र बनाया गया था। इन चारों ऋषियों का उल्लेख श्रीसुक्त में आता है। इनका वाहन उल्लुक है। प्रायः इन्हे कमल पर आसीन तथा गजमंगल के साथ अंकित किया जाता है। महालक्ष्मी आनन्द, वैभव, समृद्धि, धन-धान्य आदि की प्रदाता हैं।

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