यम संहार शिव
🎧 ऑडियो कथा · लगभग 3 मिनट · Shiva Defeating Yama
मुनि मृकण्डु और देवी मरुद्दति अपने संतुष्ट विवाहित जीवन में संतान के ना होने से दुखी थे । दोनों ने शिवजी के तप का संकल्प लेकर तपस्या आरंभ की । शिव जी ने तप से प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा । तब मुनि मृकण्डु ने संतान रूप में एक पुत्र प्रदान करने का अनुरोध किया । भगवान शंकर ने मुनि से कहा कि तुम्हें लंबी आयु वाला गुणों से रहित पुत्र चाहिए या 16 वर्ष की आयु वाला सुयोग्य बुद्धिमान पुत्र । इस पर मृकण्डु मुनि ने शिवजी से कहा मुझे गुणों से युक्त ज्ञानवान पुत्र की इच्छा है फिर चाहे उसकी आयु कम ही क्यों ना हो ।भगवान महेश्वर ने पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया और अपने निजी धाम पर प्रस्थान किया। समय अनुसार मुनि दंपत्ति के घर एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम मार्कण्डेय रखा गया मार्कण्डेय आज्ञाकारी सर्वगुण संपन्न थे । समय बीतता गया और जब 16वां वर्ष आरंभ हुआ तब माता-पिता की उदासी से दुखी मार्कंडेय ने उनसे उनके सन्ताप का कारण पूछा । कारण जानकर बालक मार्कंडेय ने कहा कि आप चिंता ना करें । ऐसा कह कर वे शिवजी की तपस्या हेतु महामृत्युंजय मन्त्र की रचना कर तपस्या करने लगे । ऊँ त्र्यंबकम् यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवर्द्धनम । ऊर्वारुकमिव बंधनात, मृत्योर्मुक्षिय मामृतात्।। अपने मृत्यु के नियत समय तक वे निरंतर शिव जी की सम्पूर्ण श्रद्धा से आराधना करते रहे । यम द्वारा भेजे गए दूत जब शिव भक्ति में लीन मार्कण्डेय का जीवन लेने में असमर्थ रहे तब यम स्वयं मार्कंडेय को मृत्यु लोक में ले जाने के लिए आए । किन्तु मार्कंडेय ने शिवलिंग को अपनी भुजाओं में भर लिया और उस से लिपटकर बैठ गए । मार्कण्डेय की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने अनेक कल्पों तक उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया। यम ने अपना पाश रूपी फंदा जैसे ही मार्कंडेय के गले मे डालने का प्रयास किया उसी क्षण शिव जी ने अपने साकार रूप में प्रकट होकर यम पर अपने त्रिशूल से प्रहार किया । शिव जी का ये रूप यम संहार मूर्ति कहलाया ।

▶काल भैरवलगभग 1 मिनट
▶शिव की पुत्री अशोक सुंदरीलगभग 1 मिनट▶अर्धनारीश्वर अवतारलगभग 1 मिनट
▶सुनतनर्तक अवतारलगभग 2 मिनट
▶चंद्रशेखर महादेव की कथालगभग 2 मिनट
▶पशुपतिनाथलगभग 1 मिनट
▶शिव बारातलगभग 2 मिनट
▶खंडोबा अवतारलगभग 2 मिनट
▶रावण द्वारा कैलाश पर्वत को झकझोरनालगभग 1 मिनट
▶गणेश जी अपनी माता पार्वती के साथ खेलते हुएलगभग 1 मिनट
▶खड़ी हुई देवी लक्ष्मीलगभग 2 मिनट
▶खड़ी हुई देवी पार्वतीलगभग 1 मिनटपूरी यात्रा →