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शिव बारात

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Shiv Baraat

भोलेनाथ शिव शंकर देव, दानव, गन्धर्व, किन्नरादि और पशुओं के प्रति भी समान रूप से स्नेहिल तथा न्यायप्रिय रहे हैं । अतह वे सभी के आराध्य रहे हैं । जब उनके विवाह की तिथि तय हुई तो अखिल विश्व आनंदित हुआ और उनके विवाह में सम्मिलित होने के लिए चल पड़ा । ऋषि, देव, दानव, गण, प्रेत, कीट, सरीसृप आदि सभी के लिए शिव विवाह का आमंत्रण था । अंततः महादेव की यह अद्भुत बारात उनके ससुराल की ओर चल पड़ी। भोले शंकर अपने प्रियभक्त नंदी की पीठ पर सवार हुए । परम पिता ब्रह्मा, श्री हरि विष्णु , और अन्य देवता भी अपने अपने वाहनों पर सवार थे । सृष्टि के सभी तत्व- वृक्ष लताएं, पर्वत नदियाँ, पुष्प आदी सभी उत्साहित थे । देव, दानव, गन्धर्व किन्नर, गण प्रेत, पशु पक्षी भी अपने अनुसार सजे धजे अनादि शिव की बारात में उपस्थित थे। ऐसी बारात ना कभी किसी ने देखी थी ना सुनी थी । ढोल, ददुंभी, नगाड़े, शंख, और भान्ति भान्ति के संगीत वाध्य बजाते हुए बाराती वधु के घर की ओर बढ़ रहे थे । बारात के आगमन की सूचना वधु पक्ष को दूर ही हो गई थी । महल के द्वार पर पहुंचने से पहले ही अपने जामाता शिवशंकर तथा बारातियों की अगुआई तथा स्वागत हेतु देवी पार्वती के पिता हिमालय ने अपने पुत्र मैनाक को भेजा । जगत पालक भगवान विष्णु इस विवाह में देवी पार्वती के भाई के रूप में वधु पक्ष की ओर से सम्मिलित हुए और अपनी बहन तथा अखिल विश्व की माता देवी पार्वती का कन्यादान किया । अनादि अनंत अविनाशी पुरुष को प्रकृतिरूपी देवी पार्वती के साथ परिणयसूत्र में बांधने के लिए पुरोहित का दायित्व सृष्टिकर्ता परमपिता ब्रह्मा द्वारा निभाया गया । आपके सामने जो दृश्य है वो इसी ब्रह्मांडीय जोड़े के विवाह की बारात का दृश्य है ।

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