शिव कथाएँ ›पट्टिका 441 · पड़ाव 80 / 141

रावण द्वारा कैलाश पर्वत को झकझोरना

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 1 मिनट · Ravana Shaking Mount Kailash

रावण द्वारा कैलाश पर्वत को हिलाना- यह क्षेत्र रावण के अभिमान और शिव तांडव स्त्रोतम की रचना की गाथा दर्शाता है। ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के उपरांत अभिमानी दशानन, मार्ग में आने वाले कैलाश पर्वत को उठाकर फेकना चाहता था। तपस्या से अर्जित शक्तियों से दशानन कैलाश को उठा लेता है जिससे आदियोगी भगवान् शिव का ध्यान भंग हो जाता है और वे अपने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबाते है जिससे दशानन का हाथ कैलाश के नीचे दब जाता है और वह पीड़ा से रोने लगता है। तब दशानन ने शिव तांडव स्त्रोत की रचना कर भगवान् शिव की स्तुति की तत्पश्चात दशानन की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवन शिव प्रकट होकर उसकी पीड़ा हरते है और उसके रुदन के कारण उसे रावन नाम भी देते है। इस प्रसंग के पश्चात् रावण, भगवान् शिव के परम भक्त के रूप में जाना जाता है।

रावण द्वारा कैलाश पर्वत को झकझोरना
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