शिव अवतार ›पट्टिका 436 · पड़ाव 75 / 141

सुनतनर्तक अवतार

🎧 ऑडियो कथा · लगभग 2 मिनट · Sunatanartaka Avatar

आप अवन्तिका क्षेत्र के सम्मुख है । इसमें तीन प्रतिमाएं है- सुनटनर्तक अवतार, चन्द्रशेखर महादेव तथा पशुपतिनाथ। सुनटनर्तक अवतार नाटक खेलने वाले को नट कहा जाता है। और भगवान शिव को सर्वश्रेष्ठ नट होने के कारण नटराज की उपाधि दी गई है। वे नृत्य से सृष्टि तथा संहार करने की क्षमता भी रखते हैं । अपने इसी कौशल से उन्होंने देवी पार्वती के माता पिता को भी प्रभावित करने का प्रयास किया था । कथा यूं है कि देवी पार्वती के पिता हिमवान से उनकी पुत्री का हाथ मागने के लिए एक बार शिवजी ने सुनटनर्तक अवतार धारण किया और हाथ में डमरू लेकर उनके द्वार पर पहुंच गए । सुनटनर्तक शिव उन्हें प्रसन्न करने के उद्देश्य से नृत्य करने लगे। उनका नृत्य अत्यंत मनोहारी था । स्वाभविक रूप से वहाँ उपस्थित सभी लोग उनसे प्रसन्न हो गए। आनंदित हो कर राजा हिमवान ने सुनटनर्तक से कुछ मांगने को कहा । सुनटनर्तक रूपी शिव ने अविलंब हिमवान की पुत्री पार्वती का हाथ मांग लिया। इस पर राजा हिमवान अति क्रोधित हो गए । तब सुनटनर्तक शिव ने अपना असली रूप दिखाकर वहाँ से प्रस्थान किया। उनके चले जाने पर राजा हिमवान तथा उनकी पत्नी देवी मैना को अपनी गलती का बोध हुआ और उन्होंने अपनी पुत्री पार्वती का विवाह शिवजी से कराने का निश्चय किया।

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